महतारी वंदन योजना से संवरी सुमित्रा की जिंदगी: बचत के पैसों से शुरू किया ‘श्रृंगार सदन’, अब हर महीने कमा रहीं मुनाफा

सरकारी सहायता को घरेलू खर्च में उड़ाने के बजाय की बचत, बम्हनीडीह के कुम्हारीकला की महिला बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का यदि सही दिशा में सदुपयोग किया जाए, तो वे आम व्यक्ति के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया है जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड अंतर्गत ग्राम कुम्हारीकला की रहने वाली श्रीमती सुमित्रा कर्ष ने। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ से मिलने वाली मासिक आर्थिक सहायता को उन्होंने केवल घरेलू खर्च तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पैसों की बचत कर खुद का व्यवसाय शुरू किया। आज वे ‘श्रृंगार सदन’ नाम से दुकान संचालित कर हर महीने करीब 2 हजार रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं।
बचत की आदत ने दिखाया नया रास्ता
सुमित्रा कर्ष के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले बेहद सामान्य थी। सीमित संसाधनों के बीच वे हमेशा से अपने पति का हाथ बंटाने और खुद अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखती थीं। इसी दौरान प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के तहत हर महीने बैंक खाते में आने वाली राशि को उन्होंने फिजूलखर्ची में गंवाने के बजाय पाई-पाई बचाना शुरू किया। जब पर्याप्त पूंजी जमा हो गई, तो उन्होंने गांव में ही महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधनों की दुकान ‘श्रृंगार सदन’ की नींव रखी।
परिवार की बनीं मजबूत ढाल
छोटे स्तर से शुरू किया गया यह कारोबार अब धीरे-धीरे चल पड़ा है। दुकान से लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद सुमित्रा को हर महीने लगभग 2 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है। इस आमदनी से वे घर-परिवार और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी छोटी-बड़ी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त होकर वे अपने परिवार की तरक्की में पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भागीदारी निभा रही हैं।
गांव की अन्य महिलाओं को दे रहीं प्रेरणा
सुमित्रा की इस पहल की गांव और आसपास के क्षेत्र में खासी सराहना हो रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई उनकी यह सफलता अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई है। सुमित्रा को आत्मनिर्भर बनते देख गांव की दूसरी महिलाएं भी बचत करने और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित हो रही हैं। सुमित्रा कहती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि समाज में स्वाभिमान से जीने का हौसला भी दिया है।




