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राधा अष्टमी आज: राधा रानी के प्राकट्य का पावन उत्सव, जानें पूजा विधि, भोग और धार्मिक कथा

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर मध्याह्न काल में हुआ था वृषभानु दुलारी का अवतरण, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त और प्रिय भोग

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🔴 धर्म डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की स्वामिनी और प्रेम-भक्ति की अधिष्ठात्री देवी श्री राधा रानी का पावन प्राकट्य उत्सव यानी ‘राधा अष्टमी’ आज 19 सितंबर, शनिवार को बड़े ही श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दोपहर के समय राधा रानी का अवतरण हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राधा जी की आराधना किए बिना श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

राधा रानी का जन्म दोपहर (मध्याह्न) में हुआ था, इसलिए मध्याह्न काल में पूजन करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है:

  • पूजन का शुभ समय: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 01:28 बजे तक
  • कुल अवधि: 2 घंटे 27 मिनट
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कमल पुष्प पर प्राकट्य की धार्मिक कथा

पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, बरसाना के राजा वृषभानु और उनकी धर्मपत्नी माता कीर्ति ने पूर्वजन्म में कठोर तपस्या की थी। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन जब राजा वृषभानु सरोवर में स्नान कर रहे थे, तब उन्हें जल में खिले एक दिव्य सहस्रदल कमल के ऊपर तेजपुंज के बीच एक नवजात कन्या अंगूठा चूसती हुई दिखाई दी। राजा वृषभानु अत्यंत स्नेह से उस दिव्य बालिका को अपने महल ले आए।

कन्या को देखकर पूरे राज्य में खुशियां छा गईं, किंतु बालिका अपनी आंखें नहीं खोल रही थी। कुछ समय बाद जब गोकुल से नंदबाबा और यशोदा मैया बाल कृष्ण को साथ लेकर वृषभानु जी के महल आए, तब नन्हे कान्हा घुटनों के बल चलते हुए उस झूले (पालने) के पास पहुंचे। कान्हा का स्पर्श पाते ही राधा रानी ने पहली बार अपनी आंखें खोलीं। पौराणिक मान्यता है कि राधा जी संसार में सबसे पहले अपने आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के ही दर्शन करना चाहती थीं।

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राधा रानी के 5 प्रिय महाभोग

  • 1. केसरिया खीर: चावल, दूध, मिश्री और मेवे से तैयार खीर राधा रानी को अत्यंत प्रिय है।
  • 2. माखन-मिश्री: युगल सरकार के भोग में ताजा माखन और मिश्री मुख्य रूप से शामिल की जाती है।
  • 3. पंचामृत: गाय का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बना पंचामृत अभिषेक व प्रसाद के लिए आवश्यक है।
  • 4. ऋतु फल: पूजा में केला, सेब, अनार और श्रीफल (नारियल) अर्पित करें।
  • 5. शुद्ध मिष्ठान: खोया पेड़ा, मालपुआ, रबड़ी या बेसन के सात्विक लड्डुओं का भोग लगाएं।

सरल पूजा विधि

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  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ पीले या लाल वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा घर में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • मध्याह्न के शुभ मुहूर्त में पंचामृत और गंगाजल से राधा रानी का प्रतीकात्मक अभिषेक करें।
  • चंदन, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप और सुगंधित पुष्प (विशेषकर कमल या गुलाब) अर्पित करें।
  • राधा रानी को प्रिय 5 भोग अर्पित कर ‘ॐ ह्रीं राधिकायै नमः’ या ‘राधे-कृष्णा’ महामंत्र का जप करें।
  • अंत में श्री राधा जी की आरती गाएं और प्रसाद वितरित करें।
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