
मानव-केंद्रित, नैतिक और समावेशी AI पर दिया ज़ोर
नई दिल्ली। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI Summit में स्पष्ट संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानव मूल्यों के अनुरूप हो। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने “MANAV Vision” पेश करते हुए कहा कि AI को मानवता की सेवा का माध्यम बनाना समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि AI मानव इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ है, लेकिन इसकी दिशा और सीमाएँ इंसानों को ही तय करनी होंगी। उन्होंने आगाह किया कि तकनीक को अनियंत्रित शक्ति बनने देने के बजाय उसे जवाबदेह और नैतिक ढांचे में विकसित करना जरूरी है।
MANAV Vision क्या है?
प्रधानमंत्री के अनुसार MANAV AI के लिए एक मार्गदर्शक ढांचा है, जो पाँच स्तंभों पर आधारित है
M – Moral (नैतिकता):
AI का विकास मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों के अनुरूप हो।
A – Accountable (जवाबदेही):
AI सिस्टम के संचालन में स्पष्ट ज़िम्मेदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता):
डेटा और डिजिटल संसाधनों पर देशों का अधिकार सुरक्षित रहे।
A – Accessible & Inclusive (सुलभ और समावेशी):
AI का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे, केवल सीमित समूहों तक नहीं।
V – Valid & Verified (वैध और भरोसेमंद):
AI कानूनी दायरे में काम करे और उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित हो।
लोकतांत्रिक AI की वकालत
प्रधानमंत्री ने कहा कि AI को कुछ चुनिंदा देशों या कंपनियों के नियंत्रण में सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने डेमोक्रेटिक और समावेशी AI पर ज़ोर देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति केवल “डेटा प्वाइंट” बनकर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना वैश्विक जिम्मेदारी है।
रोज़गार और कौशल पर संदेश
रोज़गार को लेकर उठने वाली आशंकाओं पर प्रधानमंत्री ने कहा कि AI से नौकरियाँ समाप्त नहीं होंगी, बल्कि नए प्रकार के कार्य और कौशल की मांग पैदा होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे पुनःकौशल और सतत सीखने पर ध्यान दें, ताकि AI के साथ मिलकर काम किया जा सके।
मानव-AI सहयोग का भविष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाला समय इंसान और मशीन के टकराव का नहीं, बल्कि सहयोग का युग होगा। AI मानव क्षमताओं को बढ़ाने वाला साधन बने, यही सरकार की सोच और नीति का आधार है।




