जांजगीर-चांपा: साइबर ठगी में इस्तेमाल म्यूल अकाउंट गिरोह का एक और आरोपी गिरफ्तार

साइबर थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट गिरोह के छठे आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी के बैंक खाते से ₹1.55 लाख से अधिक का लेनदेन मिला और उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा
जांजगीर-चांपा साइबर थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते के माध्यम से ₹1.55 लाख से अधिक का लेनदेन हुआ था। उसे न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने बताया कि इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है। यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट और तकनीकी जांच के आधार पर की गई।
कर्नाटक और महाराष्ट्र के मामलों से जुड़े मिले लेनदेन
पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आया कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के तीन अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में कुल ₹1,62,149 की ठगी की रकम आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल खातों में ट्रांसफर की गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर कमीशन के लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए थे।
आरोपी से पूछताछ में सामने आई जानकारी
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान 26 वर्षीय निखिल पांडेय, निवासी ग्राम पचौरी, थाना सारागांव (हाल मुकाम शंकर नगर, चांपा) के रूप में हुई है। पूछताछ के बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
पुलिस के अनुसार, म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा देता है। ऐसे खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित की जाती है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता है। कानून के तहत ऐसे खाते उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी अपराध का सहभागी माना जा सकता है।
पुलिस की अपील
साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।



