स्वतंत्रता संग्राम में श्री दूधाधारी मठ की भी अविस्मरणीय भूमिका रही — राजेश्री महन्त

जांजगीर चाम्पा। राजधानी रायपुर स्थित श्री दूधाधारी मठ के सत्संग भवन प्रांगण में गणतंत्र दिवस का पर्व हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर भारत माता एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के तैलचित्र पर विधिवत पूजा-अर्चना कर माल्यार्पण किया गया। राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने ध्वजारोहण किया। उपस्थित जनसमूह ने राष्ट्रगान गाया तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सम्मान में जयकारे लगाए।
इस अवसर पर जनसमूह को आशीर्वचन देते हुए राजेश्री महन्त जी महाराज ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में श्री दूधाधारी मठ का अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव राजेश्री महन्त वैष्णव दास जी महाराज स्वयं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले रायपुर अंचल के अनेक वीरों को उन्होंने आर्थिक, सामाजिक एवं नैतिक सहयोग प्रदान किया तथा उन्हें मठ में संरक्षण भी दिया।
कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने कहा कि आज ही के दिन वर्ष 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। उन्होंने संविधान की परिभाषा बताते हुए कहा कि नियमों और कानूनों के संग्रह को संविधान कहा जाता है, जो देश के सुचारु संचालन की आधारशिला है।
इस अवसर पर विजयपाली तथा संस्कृत विद्यालय के आचार्य सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन तोयनिधि वैष्णव ने किया। कार्यक्रम के अंतर्गत सत्संग भवन परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।





