Chhattisgarh

तिहारू भी जान गया, क्या है सुराज; सुशासन तिहार से गांवों तक पहुंचा शासन का संवाद

चौपाल में ग्रामीणों ने खुलकर रखीं जरूरतें, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी सुविधाओं की जमीनी स्थिति की हुई समीक्षा

🔴 Aaj Ki Baat News | रायपुर

सुशासन तिहार छत्तीसगढ़ शासन की ऐसी पहल के रूप में सामने आया, जिसमें शासन-प्रशासन को गांवों और शहरों तक पहुंचाकर आम लोगों की समस्याएं सुनने और उनके समाधान की दिशा में काम किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 1 मई से 10 जून 2026 तक चले इस अभियान में जनता से सीधे संवाद के साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति का जायजा लिया गया।

बस्तर का आयतु हो या सरगुजा का तिहारू, धमतरी जिले के आदिवासी बहुल नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार जैसे ग्रामीणों को भी अपनी बात सीधे प्रदेश के मुखिया के सामने रखने का अवसर मिला। सरकारी उचित मूल्य की दुकान से अनाज और अन्य खाद्य सामग्री समय पर मिल रही है या नहीं, जैसे सवाल भी ग्रामीणों ने सीधे सामने रखे। यही सीधे संवाद की सहजता सुशासन की उस अवधारणा को जमीन पर उतारती है, जिसमें जनता की आवाज को प्राथमिकता दी जाती है।

समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच

सुशासन का अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति जानी और स्थानीय जरूरतों को समझने का प्रयास किया। गांव की चौपाल में ग्रामीणों ने हैंडपंप, तालाब में घाट निर्माण, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी भवन, पहुंच मार्ग और विद्युत लाइन के विस्तार जैसी जरूरतें सामने रखीं। इसके अलावा मध्यान्ह भोजन और स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति से जुड़े विषय भी ग्रामीणों ने उठाए।

गांव, गरीब और किसानों की समस्याओं पर फोकस

ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह और शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर स्तर पर शिविर आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया और सार्वजनिक जरूरतों से जुड़े विषयों को जाना। तपती गर्मी के बीच मुख्यमंत्री का अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचना स्थानीय लोगों के लिए खास अनुभव रहा। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर ग्रामीणों ने सहजता से अपनी समस्याएं और जरूरतें रखीं। अभियान का उद्देश्य ऐसी स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रशासनिक कार्रवाई को गति देना रहा।

33 जिलों के 146 विकासखंडों में अभियान

इस वर्ष प्रदेश के सभी 33 जिलों के 146 विकासखंडों में अभियान दल गठित किए गए। राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले गांवों तक विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी पहुंचे। अभियान दलों ने गांवों में भ्रमण किया और कई स्थानों पर रात रुककर चौपाल में ग्रामीणों की समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली।

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी अभियान में भागीदारी की। मुख्यमंत्री के साथ जिलों के प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों ने विभिन्न क्षेत्रों का आकस्मिक दौरा कर अभियान की स्थिति देखी और सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का मूल्यांकन किया।

योजनाओं के क्रियान्वयन की हुई समीक्षा

सुशासन तिहार के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अंत्योदय अन्न योजना, अनाज के भंडारण और वितरण की स्थिति की समीक्षा की गई। मानसून से पहले भौगोलिक रूप से पहुंचविहीन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के समुचित भंडारण तथा बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए अमृत नमक वितरण की स्थिति भी देखी गई। मनरेगा और अन्य रोजगारमूलक कार्यों की प्रगति के साथ श्रमिकों के मजदूरी भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा हुई। राजस्व मामलों में अविवादित नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े प्रकरणों के निराकरण की स्थिति पर भी ध्यान दिया गया।

बुनियादी सुविधाओं का भी लिया जायजा

अभियान में पेयजल व्यवस्था, पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई, संपूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल ग्राम योजना, विद्युत व्यवस्था, ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों के रखरखाव की स्थिति देखी गई। कृषि पंपों के विद्युतीकरण और एकल बत्ती कनेक्शन से जुड़े कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं, पेंशन, निराश्रित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की स्थिति को भी समीक्षा के दायरे में रखा गया।

जनता और शासन के बीच संवाद का माध्यम

सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार और जनता के बीच सीधे संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया गया। चौपाल में ग्रामीणों को अपनी स्थानीय समस्याएं और जरूरतें सीधे सामने रखने का अवसर मिला, वहीं प्रशासन को योजनाओं और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति समझने का माध्यम मिला।

यही वह बदलाव है, जहां तिहारू जैसे गांव का आम ग्रामीण यह समझ पाता है कि सुराज केवल सरकारी शब्द नहीं, बल्कि ऐसा शासन है जो जनता की बात सुनने उसके बीच तक पहुंचता है।

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