Chhattisgarhnationalजाँजगीर -चाँपाधर्म भक्ति

संस्कृति और पारिवारिक एकजुटता की मिसाल! नैला के बसईवाल परिवार ने बिहार के गया जी और जांजगीर में धूमधाम से मनाई पितृ देव दिवाली

मोक्ष तीर्थ गया जी एवं जांजगीर में एक साथ संपन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान; पूर्वजों को किया नमन, पीढ़ियों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन

🔴 आज की बात News | नैला/जांजगीर। सनातन परंपरा, पूर्वजों के प्रति गहरी कृतज्ञता और पारिवारिक एकजुटता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए नैला के प्रतिष्ठित बसईवाल परिवार द्वारा गुरुवार को पितृ देव दिवाली का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर परिवार के सदस्यों द्वारा छत्तीसगढ़ के जांजगीर के साथ-साथ बिहार स्थित पवित्र मोक्षधाम गया जी में भी भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न किए गए।

पवित्र तीर्थ गया जी (बिहार) में विधि-विधान से संपन्न हुआ पूजन

हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति में पितरों की मुक्ति, शांति और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए गया जी तीर्थ को सर्वोत्तम स्थान माना गया है। इसी पावन मान्यता का निर्वहन करते हुए नैला के बसईवाल परिवार के सदस्यों ने बिहार के गया जी तीर्थ में पहुंचकर पितृ देव दिवाली का उत्सव धूमधाम से मनाया। वहां उपस्थित परिवारजनों ने वैदिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और पूर्ण निष्ठा के साथ पूजा-अर्चना कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया और उनकी आत्मिक शांति के लिए मंगलकामनाएं कीं।

जांजगीर में भी दिखा आस्था और उत्साह का माहौल

एक ओर जहां परिवार के सदस्य गया जी तीर्थ में पूर्वजों को तर्पण और नमन कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर जांजगीर में भी बसईवाल परिवार के सदस्यों एवं स्वजनों ने एकत्रित होकर देव दिवाली का पर्व भव्य रूप से मनाया। दीप प्रज्वलन और विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना के दौरान पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार देखने को मिला। दोनों प्रमुख स्थलों पर एक साथ आयोजित इस पर्व ने संपूर्ण परिवार को श्रद्धा और अपनत्व के सूत्र में बांध दिया।

धार्मिक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों के प्रति समर्पण

इस भव्य आयोजन के माध्यम से बसईवाल परिवार ने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं और अटूट पारिवारिक एकता के प्रति गहरा समर्पण प्रकट किया। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का यह पर्व परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे आयोजनों से जहां पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वहीं युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों, संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है।

Related Articles

Back to top button