साइबर ठगों को किराए पर बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले आठ आरोपी गिरफ्तार: एक दिन में करोड़ों का हुआ था लेनदेन, जांजगीर साइबर थाना पुलिस की कार्रवाई

कमीशन के फेर में 10 से अधिक राज्यों की ऑनलाइन ठगी की रकम खपाने का खेल; लेयर-1 में आए करोड़ों रुपये, पासबुक जब्त व खातों में लगी होल्ड
🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिला साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और अंतरराज्यीय साइबर ठगी के सिंडिकेट पर बड़ी चोट करते हुए ‘म्यूल बैंक खातों’ (किराए के खातों) के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने साइबर ठगों को बैंक खाते और नए जारी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले गिरोह के 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन खातों में महज एक-एक दिन के भीतर करोड़ों रुपये के संदिग्ध साइबर फ्रॉड ट्रांजेक्शन हुए हैं।
10 हजार से 1 लाख तक के कमीशन का लालच
पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशानुसार साइबर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी कमीशन के लालच में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक सहित विभिन्न राष्ट्रीयकृत व निजी बैंकों में अपने नाम से खाते खुलवाते थे।खाता खोलने के बाद आरोपी अपने नाम से जारी नए सिम कार्ड, बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड दूसरे राज्यों के साइबर ठगों को सौंप देते थे। इस काम के एवज में उन्हें प्रत्येक खाते पर 10 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का मोटा कमीशन दिया जाता था।
10 से ज्यादा राज्यों में दर्ज हैं शिकायतें
पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की पहली कड़ी यानी ‘लेयर-1’ (Layer-1) के रूप में किया जा रहा था। देशभर के पीड़ितों से ठगी गई रकम सीधे इन्हीं खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी।कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, असम, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से इन खातों के विरुद्ध साइबर पोर्टल पर शिकायतें दर्ज थीं। कई बैंक खातों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में 5 से 15 बार तक प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज पाई गई हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक व अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। वर्तमान में इन खातों में जमा लाखों रुपयों को होल्ड करा दिया गया है और संबंधित राज्यों की पुलिस को राशि वापसी की प्रक्रिया के लिए सूचित किया गया है।
कड़ी धाराओं में अपराध पंजीबद्ध, जेल भेजे गए ये आरोपी
साइबर थाना जांजगीर में आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 20/2026 धारा 61(2), 317(4), 317(5), 318(4), 323 बीएनएस (BNS) तथा 66डी आईटी एक्ट के तहत गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

- कलेशराम देवांगन उर्फ छोटू (38 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 07, भाठापारा सिवनी, थाना चांपा
- श्यामलाल देवांगन उर्फ राजू (34 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 07, भाठापारा सिवनी, थाना चांपा
- लक्ष्मीनारायण पटेल (46 वर्ष) – निवासी ग्राम कुम्हारी, थाना गिधौरी, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा
- वेमेश आदित्य (38 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 15, बुधवारी बाजार जांजगीर, थाना जांजगीर
- ज्योति बाई यादव (40 वर्ष) – निवासी ग्राम बनारी डीहपारा, वार्ड नं. 05, थाना जांजगीर
- सुरेश कुमार गढेवाल (32 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 11, ग्राम पाली, चौकी नैला
- अनिल राठौर (29 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 17, चंदनिया पारा, थाना जांजगीर
- इश्तेखार अहमद (29 वर्ष) – निवासी वार्ड नं. 21, खड़पड़ीपारा, थाना जांजगीर
सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
क्या होता है ‘म्यूल खाता’? पुलिस की आम जनता से सख्त अपील
म्यूल खाता (Mule Account):
यह ऐसा बैंक खाता होता है, जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या किराए के लालच में साइबर ठगों को इस्तेमाल के लिए दे देता है। साइबर अपराधी गैर-कानूनी ढंग से लूटी गई रकम को छुपाने या निकालने के लिए इन खातों का उपयोग करते हैं। कानूनन, अवैध लेनदेन पाए जाने पर मूल खाताधारक को ही प्राथमिक आरोपी माना जाता है।
जांजगीर-चांपा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या परिचित व्यक्ति के बहकावे में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, यूपीआई क्रेडेंशियल अथवा अपने नाम से जारी सिम कार्ड कभी किसी अन्य को न दें। यदि आपके खाते या नंबर से कोई भी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि होती है, तो कानून की नजर में पहली जवाबदेही खाताधारक की होगी। साइबर ठगों से सतर्क रहें और किसी भी संदेहास्पद प्रस्ताव की सूचना तत्काल नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन पर दें।




