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गांव के मैदान से अंतरराष्ट्रीय मंच तक खेल प्रतिभाओं को पहुंचाना हमारा लक्ष्य: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की खेल उत्कर्ष मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा

प्रतिभा पहचान से लेकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक तैयार होगा मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम; बिलासपुर एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता बढ़कर होगी 300

🔴 आज की बात News | रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ की प्रगति और आगामी रूपरेखा की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत उन्हें समय पर पहचानकर वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और उचित अवसर देने की है। हमारा लक्ष्य ग्रामीण खेल मैदानों से निकली प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचाना है।

जमीनी स्तर से शुरू होगी खोज, स्कूलों से जुड़ेगा अभियान

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि खेल प्रतिभाओं की तलाश केवल बड़े शहरों या चुनिंदा अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में तीरंदाजी और कबड्डी जैसे खेलों के प्रति स्वाभाविक रुझान है। उन्होंने स्कूल स्तर से ही बच्चों को नियमित खेल गतिविधियों से जोड़ने और व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से प्रतिभाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य खेलों को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रदेश में अनुकूल माहौल तैयार करना है।

फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक सुनियोजित तंत्र

मिशन के तहत एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, बॉक्सिंग, कुश्ती, वेटलिफ्टिंग, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी जैसे प्राथमिकता वाले खेलों के लिए त्रि-स्तरीय ढांचा तैयार किया जा रहा है। प्रारंभिक स्तर पर फीडर सेंटरों के जरिए बच्चों को बुनियादी प्रशिक्षण मिलेगा, जिसके बाद उत्कृष्ट खिलाड़ियों को राज्य की खेल अकादमियों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भेजा जाएगा। इसी कड़ी में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की आवासीय क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने और वहां नई खेल विधाओं को जोड़ने की योजना पर मुहर लगाई गई।

स्पोर्ट्स साइंस, आधुनिक पोषण और टैलेंट हंट

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में तकनीक और खेल विज्ञान के बिना वैश्विक प्रतिस्पर्धा संभव नहीं है। मिशन के तहत खिलाड़ियों के लिए फिटनेस, फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, पोषण और चोटों से बचाव (इंजरी रिहैबिलिटेशन) की सुविधाएं अनिवार्य की जाएंगी। इसके साथ ही विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर टैलेंट हंट और ‘मुख्यमंत्री ट्रॉफी’ प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा, जिससे खिलाड़ियों को निरंतर मैच प्रैक्टिस मिल सके।

महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को विशेष प्रोत्साहन

समीक्षा बैठक में महिला और दिव्यांग (पैरा) एथलीटों के विकास पर विशेष बल दिया गया। ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने वाली खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बेटियों को सुरक्षित माहौल, विशेष कैंप और आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी।

बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील सहित स्कूल शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव व सचिव उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से अगले 5 वर्षों की वित्तीय व प्रशासनिक कार्ययोजना को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।

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