
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला; 589 दिन, 126 तारीखें और 22 गवाहों के बाद मिला इंसाफ
🔴 आज की बात News | मेरठ। देशभर को झकझोर कर रख देने वाले मेरठ के बहुचर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ में अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने पूर्व मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (फांसी की सजा) सुनाई है। अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) की श्रेणी में रखते हुए दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
‘दंड भी धर्म है’: जज ने महाभारत का उल्लेख कर सुनाई सजा
फैसला सुनाते समय जिला जज ने महाभारत का प्रसंग उद्धृत करते हुए अहम टिप्पणी की कि ‘दंड भी धर्म है’ यानी अपराधी को उसके कुकर्मों के लिए न्यायोचित दंड देना न्यायपालिका का परम धर्म है। जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों आरोपियों की पेशी कराई गई थी। जिला अदालत ने 30 सितंबर को ही दोनों को हत्या (आईपीसी धारा 302) और साक्ष्य मिटाने (धारा 201) के तहत दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद बुधवार को सजा पर मुहर लगाई गई।
हत्या कर शव के किए थे टुकड़े, नीले ड्रम में सीमेंट भरकर किया था बंद
यह सनसनीखेज वारदात मार्च 2025 में घटित हुई थी। अवैध संबंधों के चलते मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पति सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी थी। वारदात को छिपाने और सबूत नष्ट करने के इरादे से दोनों ने शव के पांच टुकड़े किए और उसे एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट और रेत का घोल भरकर सील कर दिया था। इस जघन्य कृत्य के बाद आरोपी शिमला घूमने चले गए थे और तस्वीरें साझा की थीं। जब दुर्गंध और परिजनों के शक के आधार पर ड्रम खोला गया, तो अंदर का खौफनाक मंजर देखकर पुलिस और जनता के होश उड़ गए थे।
126 पेशियां, 22 गवाह और 589 दिन बाद रो पड़ी पीड़ित मां
सरकारी वकील (डीजीसी) केके चौबे के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने अदालत में पुख्ता वैज्ञानिक, फोरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश किए। पूरे मामले में 126 तारीखों की सुनवाई हुई और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष ने दोनों की बेटियों का हवाला देकर रहम की मांग की, जिसे कोर्ट ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए सिरे से खारिज कर दिया। अदालत के फैसले के बाद मृतक सौरभ की मां रेणू और भाई बबलू ने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज सौरभ की आत्मा को सच्ची शांति मिली है।




