छत्तीसगढ़ में फिर मंडराया चक्रवाती तूफान का खतरा: 2 से 4 नवंबर तक भारी बारिश का अलर्ट, 60 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन बढ़ाएगा आफत; धान कटाई के बीच बारिश के नए दौर से किसानों की बढ़ी चिंता
🔴 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है और प्रदेशवासियों पर बारिश का एक और दौर दस्तक देने के लिए तैयार है। बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब (डिप्रेशन) तेजी से मजबूत होकर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की ओर बढ़ रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस चक्रवाती सिस्टम के असर से 2 से 3 नवंबर के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश होगी, जबकि 3 और 4 नवंबर को कई इलाकों में मूसलाधार बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।
24 घंटे में चक्रवाती तूफान का रूप लेगा सिस्टम, दक्षिण छत्तीसगढ़ में ज्यादा असर
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय अवदाब अगले 24 घंटों के भीतर चक्रवाती तूफान का रूप धारण कर सकता है, जिसके 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट पर टकराने का अनुमान है। इस सिस्टम की वजह से छत्तीसगढ़ के मौसम में तेजी से बदलाव आएगा। इसका सबसे ज्यादा असर दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग और आसपास के मैदानी इलाकों में देखने को मिलेगा, जहां भारी वर्षा की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं।
आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका, 60 किमी तक पहुंचेगी हवा की रफ्तार
मौसम विभाग ने 2 नवंबर को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी चलने और वज्रपात की चेतावनी दी है। इस दौरान हवा की रफ्तार सामान्यतः 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जो झोंकों के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है। इसके अलावा 3 और 4 नवंबर को भी तेज गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। बारिश से पहले आगामी दो दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
कटाई के समय बारिश की मार, अन्नदाताओं के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
लगातार बदलते मौसम और बारिश की इस नई चेतावनी ने किसानों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में हुई बेमौसम बारिश से कई जिलों में धान की पकी फसलें पहले ही खेतों में गिरकर खराब हो चुकी हैं। अब जब किसान खेतों से पानी निकालने और कटाई की तैयारी में जुटे थे, तब बारिश का यह नया दौर अन्नदाताओं की मुश्किलें और अधिक बढ़ा सकता है। खेतों में दोबारा जलभराव होने से खड़ी व कटी हुई फसलों के सड़ने का खतरा गहरा गया है।



