भारी बारिश से फसल नुकसान का आकलन शुरू, प्रभावित गांवों में खेतों का जायजा ले रहीं कृषि विभाग की टीमें

बीमाधारक किसान 72 घंटे के भीतर पोर्टल या 14447 पर दें सूचना, गैर-बीमितों को RBC 6-4 के तहत मिलेगा मुआवजा: कृषि उप संचालक
🔴 जांजगीर-चांपा। जिले में 28 एवं 29 अक्टूबर को हुई भारी बारिश के कारण फसलों को पहुंचे नुकसान का आकलन करने के लिए प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। कलेक्टर के निर्देशानुसार कृषि विभाग के समस्त अधिकारी और मैदानी कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर खेतों का जायजा ले रहे हैं। विभाग की टीमों द्वारा प्रभावित गांवों में फसल नुकसान का विस्तृत सर्वे कार्य शुरू कर दिया गया है, ताकि पीड़ित किसानों को तत्काल राहत प्रदान की जा सके।
बीमाधारक किसान 72 घंटे के भीतर दर्ज कराएं क्लेम की जानकारी
उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं। किसान भाई ‘कृषि रक्षा पोर्टल’ अथवा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर कॉल करके सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वहीं जिन किसानों ने फसल बीमा नहीं कराया है, वे अपने क्षेत्र के पटवारी एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) से तत्काल संपर्क कर आर.बी.सी. 6-4 के तहत क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन दे सकते हैं।
खेतों से जल निकासी करें, नुकसान के फोटो-वीडियो रखें सुरक्षित
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने खेतों में हुए नुकसान के फोटो और वीडियो साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखें। इसके अलावा फसलों को सड़ने से बचाने के लिए खेतों में जमा अतिरिक्त बारिश के पानी की तुरंत निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था करें। जलभराव के चलते कीट व फफूंदजनित रोगों की आशंका को देखते हुए फसलों की नियमित निगरानी करने और मौसम साफ होने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही अनुशंसित कीटनाशक या कवकनाशक का प्रयोग करने की अपील की गई है।
पारदर्शिता के साथ सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने के कड़े निर्देश
कलेक्टर ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नुकसान का सर्वे पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ तैयार किया जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, ताकि शासन के नियमानुसार सभी पात्र और प्रभावित अन्नदाताओं को समय पर राहत राशि अथवा बीमा क्लेम की राशि का भुगतान किया जा सके।




