वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: बंद राइस मिल में इमारती लकड़ी तस्करी का खुलासा, 15 से अधिक ट्रकों में तेंदू-खैर की लकड़ी जब्त, करोड़ों की कीमत का अनुमान

जांजगीर-चांपा। रायगढ़ और जांजगीर‑चांपा वन मंडलों की संयुक्त टीम ने ग्राम भादा स्थित एक बंद राइस मिल परिसर में छापेमार कार्रवाई कर इमारती लकड़ी की बड़े पैमाने पर तस्करी का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान 15 से अधिक ट्रक तेंदू और खैर की लकड़ी जब्त की गई है, जिसकी प्रारंभिक अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। यह सफलता वन विभाग की सतर्कता और प्रभावी सूचना तंत्र को दर्शाती है।
वन मंडलाधिकारी हिमांशु डोंगरे ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सूचना मिली थी कि मजदा और ट्रक जैसे भारी वाहनों के माध्यम से इमारती लकड़ी की अवैध ढुलाई की जा रही है। सोमवार रात उड़नदस्ता टीम ने संदिग्ध वाहनों का पीछा करते हुए भादा तक पहुंचकर स्थानीय वन अमले को सतर्क किया।
इसके बाद संयुक्त टीम ने बंद राइस मिल परिसर में छापा मारा, जहां एक अवैध आरा मिल संचालित पाई गई और बड़ी मात्रा में लकड़ी का अवैध भंडारण मिला। मौके से बरामद तेंदू और खैर की लकड़ी का व्यापार बिना अनुमति प्रतिबंधित है। टीम के पहुंचते ही परिसर में मौजूद कर्मचारी फरार हो गए। एहतियातन पूरे परिसर को सील कर दिया गया है तथा जब्त लकड़ियों की गिनती का कार्य जारी है। एक मजदा और एक ट्रक में लदी लकड़ी को वन डिपो भेज दिया गया है।
जांच के दौरान परिसर से एक डायरी भी बरामद हुई है, जिसमें वाहनों की आवाजाही से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण दर्ज हैं। इस डायरी को जब्त कर इसके आधार पर तस्करी में शामिल गिरोह और उसके नेटवर्क की गहन पड़ताल शुरू कर दी गई है। विभाग अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी संपर्क स्थापित कर रहा है, ताकि अवैध कारोबार के संभावित अंतरराज्यीय संबंधों का पता लगाया जा सके।
वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदू की लकड़ी का उपयोग विशेष रूप से 12 बोर बंदूक की मुट्ठी बनाने में होता है, जबकि खैर की लकड़ी से कत्था तैयार किया जाता है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में खैर की लकड़ी को चंदन बताकर बेचने का प्रयास किया गया, जिसे गंभीर अपराध की श्रेणी में माना गया है।




