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छत्तीसगढ़ का प्रमुख हरेली तिहार आज, हल-कृषि औजारों की होगी पूजा

किसानों के लिए खास महत्व रखने वाले पर्व पर गेंड़ी चढ़ने और नारियल फेंक प्रतियोगिता का रहेगा उत्साह

🔴 Aaj Ki Baat News | जांजगीर-चांपा

छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार आज मनाया जाएगा। सावन माह की अमावस्या पर मनाए जाने वाले इस पर्व का किसानों और कृषि परंपराओं से विशेष जुड़ाव है। इस अवसर पर किसान हल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग होने वाले कृषि औजारों की पूजा-अर्चना करेंगे।

कृषि औजारों की पूजा के साथ होगी पर्व की शुरुआत

हरेली तिहार पर किसान सुबह कृषि औजारों को धोकर साफ करेंगे। इसके बाद आंगन में चौक सजाकर हल, हंसिया, फावड़ा, कुल्हाड़ी, रापा, धमेला सहित खेती में उपयोग होने वाले अन्य औजारों को रखकर परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना की जाएगी। पूजा के बाद गुड़, चीला और नारियल का भोग लगाया जाएगा। खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बैलों की जोड़ी की भी पूजा करने की परंपरा है। उन्हें छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा।

गेंड़ी और नारियल फेंक प्रतियोगिता का उत्साह

हरेली तिहार पर बच्चों और युवाओं में बांस की गेंड़ी चढ़ने को लेकर विशेष उत्साह रहता है। गांवों में पारंपरिक खेल और मनोरंजक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं। कई जगहों पर नारियल फेंक प्रतियोगिता भी शुरू हो चुकी है। नारियल को दूर तक फेंकने और फोड़ने जैसी प्रतियोगिताओं में युवा हिस्सा लेते हैं। इन पारंपरिक खेलों के कारण हरेली तिहार पर ग्रामीण क्षेत्रों में उत्सवी माहौल बनता है।

घरों में बनेंगे पारंपरिक पकवान

हरेली तिहार को लेकर घरों में चीला, बोबरा सहित अन्य पारंपरिक पकवान बनाए जाएंगे। वहीं बाजार में गुड़, नारियल, तेल और अन्य खाद्य सामग्री की बिक्री बढ़ गई है।

प्रकृति के प्रति आभार का पर्व

पंडित अखिलेश शुक्ला के अनुसार हरेली तिहार मुख्य रूप से प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। सावन में बारिश और चारों ओर हरियाली के बीच किसान नई फसल की तैयारी में जुटे रहते हैं। ऐसे में हरेली का पर्व प्रकृति और कृषि से गहरे जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती, जल, वायु और पेड़-पौधों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। कृषि कार्य में उपयोग होने वाले औजारों और खेती में योगदान देने वाले बैलों की पूजा भी इसी परंपरा का हिस्सा है।

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