बुजुर्ग से 32 लाख की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी: जांजगीर साइबर पुलिस ने इंदौर से दो शातिरों को दबोचा

CBI और मुंबई पुलिस का खौफ दिखाकर 24 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट; पंजाब के बाद अब इंदौर से पकड़ाए बैंक खाता धारक आरोपी
🔴 जांजगीर-चांपा। जांजगीर साइबर थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख रुपये की बड़ी ठगी करने वाले गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी सौम्य जैसवार (21 वर्ष, निवासी प्रजापत नगर, इंदौर) और देवराज अमकरे (24 वर्ष, निवासी गुरु शंकर नगर, इंदौर) हैं। दोनों ने ठगी की रकम खपाने के लिए अपने बैंक खातों का उपयोग किया था। पुलिस ने इनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल हैंडसेट, सिम, बैंक दस्तावेज, पैन कार्ड और पहचान पत्र विधिवत जब्त किए हैं।
24 घंटे से ज्यादा समय तक डिजिटल अरेस्ट, ऐसे रचा ठगी का जाल
जांजगीर निवासी बुजुर्ग तुषारकर देवांगन ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी ‘विजय खन्ना’ बताया। उसने आरोप लगाया कि बुजुर्ग के मोबाइल नंबर का उपयोग बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में इसके तहत केस दर्ज है। इसके तुरंत बाद कथित सीबीआई अधिकारी बनकर दूसरे व्यक्ति ने कॉल किया और उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया। केस रफा-दफा करने और पुलिस सेटिंग के नाम पर बुजुर्ग को लगातार 24 घंटे तक डराकर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में 32 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। बाद में जब सभी नंबर बंद हो गए, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
स्लाइस बैंक खातों के जरिए इंदौर तक पहुंची पुलिस की टीम
शिकायत पर साइबर थाने में अपराध क्रमांक 649/2025 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66डी आईटी एक्ट के तहत जुर्म दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच में पाया गया कि ठगी की रकम ‘स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक’ के खातों में ट्रांसफर हुई है। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम इंदौर भेजी गई, जहां दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने अपने बैंक खातों में पैसे मंगाए थे। साक्ष्य पुख्ता होने पर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। उल्लेखनीय है कि इसी मामले में पूर्व में पंजाब से भी एक आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस की अपील: कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं
जांजगीर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स सप्लाई, नेवी या कस्टम का डर दिखाकर पैसे मांगे या अरेस्ट करने की धमकी दे, तो घबराएं नहीं। यह साइबर ठगी का जाल है। ऐसे मामलों में तुरंत नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें।



