डोंगाकोहरौद में अखंड नवधा रामायण की धूम: 200 से अधिक मानस मंडलियों ने दी प्रस्तुति, रामरस में डूबे श्रद्धालु

चौपाई-दोहों की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल; सुबह-शाम महाआरती के साथ दोनों पहर चल रहा विशाल भंडारा
🔴 जांजगीर-चांपा। पामगढ़ विकासखंड के समीपस्थ ग्राम डोंगाकोहरौद में आयोजित अखंड नवधा रामायण समारोह में आस्था और भक्ति का जनसैलाब उमड़ रहा है। 27 अक्टूबर से प्रारंभ हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में स्थानीय सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से मानस मंडलियों का तांता लगा हुआ है। सुबह और शाम को विधि-विधान से महाआरती एवं पूजा-अर्चना संपन्न हो रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर पुण्य लाभ ले रहे हैं।
दोहा-चौपाइयों और टीका पर झूम रहे श्रोता, 200 से अधिक टोलियां पहुंचीं
अखंड नवधा रामायण के मंच पर विभिन्न मानस मंडलियों द्वारा श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों और दोहों का सुमधुर संगीत के साथ गायन किया जा रहा है। मानस विद्वानों द्वारा प्रस्तुत प्रसंगों की सारगर्भित व्याख्या और टीका को सुनने के लिए गांव सहित आसपास के ग्रामीण सुबह से देर रात तक पांडाल में डटे रहते हैं। अब तक 200 से अधिक गांवों की मानस टोलियां अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। आयोजन समिति का कहना है कि आगामी दो दिनों में मंडलियों की संख्या में और वृद्धि होगी। समिति द्वारा बाहर से आने वाली प्रत्येक टोली को दूरी के आधार पर यात्रा व्यय (उपहार स्वरूप) भेंट किया जा रहा है।
आचार्य उमाशंकर पाण्डेय करा रहे अनुष्ठान, कौशिक दंपति बने यजमान
इस धार्मिक आयोजन में गांव के विद्वान आचार्य उमाशंकर पाण्डेय मुख्य आचार्य के रूप में संपूर्ण पूजा-अर्चना संपन्न करा रहे हैं। वहीं शिक्षक ईश्वर कौशिक सपरिवार यजमान के रूप में विधिवत पूजन कार्य में संलग्न हैं। आयोजन स्थल पर दोनों समय श्रद्धालुओं और आगंतुक मंडलियों के लिए विशाल भंडारे का प्रबंध किया गया है, जिसमें ग्रामवासियों और दानदाताओं का भरपूर सहयोग मिल रहा है। भंडारे के लिए ईश्वर कौशिक, राजेश कश्यप (रायगढ़) सहित कई दानदाताओं ने एक-एक दिन के भोजन का खर्च वहन किया है।
सेवा में मातृशक्ति भी आगे, खीर-पूरी का लगाया भोग
आयोजन को सफल बनाने में मातृशक्ति भी बढ़-चढ़कर योगदान दे रही है। अनुष्ठान के छठवें दिन की आरती एवं महाप्रसाद (खीर-पूरी) की पूरी व्यवस्था मंडली पारा की महिलाओं द्वारा की गई। सेवा कार्य में गोदावरी कश्यप, राधाबाई पटेल, चंपा बाई, श्रीमती श्रीवास सहित मोहल्ले की अन्य महिलाएं सक्रिय रूप से जुटी रहीं।



