अभूतपूर्व: 1000 साल बाद जांजगीर में कल होंगे उस ‘दिव्य सोमनाथ शिवलिंग’ के दर्शन, जिसे गजनी भी नष्ट नहीं कर सका

जांजगीर-चांपा । छत्तीसगढ़ की न्यायधानी के करीब स्थित जांजगीर की धरती शनिवार, 25 अप्रैल को एक ऐसी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटना की साक्षी बनने जा रही है, जो सदियों के इतिहास को जीवंत कर देगी। जांजगीर के रानी सती दादी मंदिर में उस पवित्र प्राचीन शिवलिंग के दर्शन होंगे, जिसका सीधा संबंध सोमनाथ मंदिर पर हुए महमूद गजनी के आक्रमण से है।
हवा में तैरते शिवलिंग की अद्भुत गाथा
इतिहास के पन्नों के अनुसार, 1000 साल पहले जब महमूद गजनी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था, तब वहां का मुख्य शिवलिंग अपनी चुंबकीय शक्ति के कारण हवा में स्थापित था। हमले के दौरान जब शिवलिंग को क्षति पहुँचाई गई, तो उसके अवशेषों को दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अत्यंत गोपनीयता के साथ सुरक्षित रख लिया था। सदियों तक कई पीढ़ियों ने इन अवशेषों की पूजा उसी श्रद्धा से की, जैसे वे मूल ज्योतिर्लिंग हों।
भविष्यवाणी और श्री श्री रवि शंकर जी का संकल्प
कहा जाता है कि प्राचीन समय में शंकराचार्य जी ने भविष्यवाणी की थी कि देश की स्वतंत्रता और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद, ‘शंकर’ नाम के एक संत का प्रादुर्भाव होगा, जिन्हें यह शिवलिंग सौंपा जाएगा। इसी कड़ी में, दक्षिण भारत के उन ब्राह्मण परिवारों ने यह दिव्य शिवलिंग ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जी को सौंप दिया।
अब गुरुदेव के संकल्प के अनुसार, इन अवशेषों को पुनः सोमनाथ में स्थापित करने से पहले पूरे देश में दर्शन के लिए ले जाया जा रहा है।

जांजगीर में दर्शन का स्वर्णिम अवसर
यह जांजगीर के शिवभक्तों के लिए सौभाग्य की बात है कि उन्हें उस ऊर्जा का अनुभव करने मिलेगा जिसने 1000 वर्षों का कालखंड देखा है।
आयोजन की जानकारी:
दिनांक: 25 अप्रैल 2026, शनिवार
समय: शाम 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
स्थान: रानी सती दादी मंदिर, जांजगीर
मुख्य आकर्षण: सामूहिक आराधना और दिव्य शिवलिंग के साक्षात दर्शन।
आयोजकों की अपील
आर्ट ऑफ लिविंग परिवार जांजगीर-चांपा ने जिले के सभी नागरिकों और धर्मप्रेमियों से अपील की है कि इस ऐतिहासिक और दिव्य अवसर का लाभ उठाने के लिए सपरिवार पहुँचें। अधिक जानकारी के लिए मो. 94076 05783 पर संपर्क किया जा सकता है।



