शेयर बाजार में ‘ब्लैक गुरुवार’: मिडिल ईस्ट में कोहराम से सेंसेक्स 1700 अंक टूटा, निवेशकों के 15 लाख करोड़ स्वाहा

डिजिटल डेस्क। मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया) में अचानक उपजे भीषण सैन्य तनाव का सीधा और घातक असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। बुधवार की तेज बढ़त के बाद, गुरुवार को बाजार खुलते ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। शुरुआती सत्र के मात्र कुछ ही मिनटों के कारोबार में, चौतरफा बिकवाली के दबाव के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स ‘सेंसेक्स’ ऐतिहासिक रूप से 1700 अंकों से ज्यादा टूट गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ‘निफ्टी’ भी 500 अंकों से अधिक की भारी गिरावट के साथ धराशायी हुआ। इस तीव्र बिकवाली के तूफान ने निवेशकों के देखते ही देखते लाखों करोड़ (अनुमानित 15 लाख करोड़ से अधिक) रुपये डुबो दिए।
ईरान-कतर तनाव: ऊर्जा सेक्टर पर हमला बना बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अप्रत्याशित और तेज गिरावट की प्राथमिक और सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव का अचानक बढ़ जाना है। ताजा खबरों के मुताबिक, ईरान द्वारा कतर के महत्वपूर्ण गैस और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भीषण सैन्य हमला किया गया है। अब तक यह संघर्ष सैन्य ठिकानों तक सीमित था, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) के प्रमुख ठिकानों तक पहुंचने के बाद, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल चरम पर पहुंच गया है। कतर जैसे बड़े ऊर्जा उत्पादक देश पर सीधे हमले ने वैश्विक तेल और गैस की निर्बाध सप्लाई पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
तेल की कीमतें उछलने का डर, बाजार में हाहाकार
कतर पर हमले के बाद, वैश्विक तेल निर्यात प्रभावित होने की खबर ने पूरी दुनिया में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल की आशंका पैदा कर दी है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) को और हवा दे सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा गहरा सकता है। इस डर से, भारतीय बाजार के सभी प्रमुख सेक्टर्स (विशेषकर ऑटो, बैंकिंग और आईटी) में निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए तेजी से बिकवाली की, जिससे अधिकांश सेक्टर्स लाल निशान में गोता लगाते नजर आए।
एशियाई और वैश्विक बाजारों में भी भारी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के प्रमुख एशियाई बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई है। जापान (Nikkei), हॉन्गकॉन्ग (Hang Seng) और अन्य प्रमुख एशियाई शेयर बाजारों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे वहां भी भारी बिकवाली देखी गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों में डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या युद्ध व्यापक रूप लेता है, तो इसका असर लंबे समय तक बाजार पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी मंदी का गहरा संकट मंडरा सकता है। फिलहाल, बाजार की इस अस्थिर स्थिति को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने, जल्दबाजी में बड़े निवेश के फैसले लेने से बचने और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दी जा रही है।




