किसान भाइयों के लिए काम की खबर: अब स्वर्णा की जगह लगाएं ‘एम.टी.यू.-1318’ धान, कम बीमारी में मिलेगी बंपर पैदावार

150 दिनों में पककर तैयार होगी फसल, गिरने की समस्या से मिलेगी मुक्ति; बीज निगम खोखसा में उपलब्ध है उन्नत किस्म
जांजगीर-चांपा। खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान की पारंपरिक किस्म ‘स्वर्णा’ (MTU-7029) के स्थान पर उन्नत किस्म एम.टी.यू.-1318 (MTU-1318) अपनाने की सलाह दी है। यह किस्म स्वर्णा की तुलना में अधिक सुरक्षित और लाभप्रद मानी जा रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
क्यों खास है एम.टी.यू.-1318
एम.टी.यू.-1318 एक लंबी अवधि वाली धान की किस्म है, जो 150 से 155 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका ‘गिराव प्रतिरोधी’ (Lodging Resistant) होना है, जिससे तेज हवा या बारिश में फसल के गिरने का खतरा कम रहता है। इसके दाने पतले और मध्यम लंबे होते हैं, जो बाजार में अच्छी मांग रखते हैं।
उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता:
इसकी औसत उपज क्षमता 50 से 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। यह किस्म ब्लास्ट (झुलसा रोग) और शीत राट जैसी बीमारियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है, जिससे कीटनाशकों का खर्च कम होता है। यह सभी प्रकार की मिट्टी के लिए उपयुक्त है और सिंचित क्षेत्रों में इसका प्रदर्शन बेहद शानदार रहता है।
यहाँ उपलब्ध है बीज:
इच्छुक किसान भाई इस उन्नत किस्म के बीज प्राप्त करने के लिए अपनी नजदीकी सेवा सहकारी समितियों या बीज निगम खोखसा में अपनी मांग प्रेषित कर सकते हैं। समय पर मांग दर्ज कराकर किसान सुगमता से बीज प्राप्त कर सकते हैं और सीजन की शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकते हैं।




