
पुलिस के रेस्क्यू ऑपरेशन में 6 नाबालिग मुक्त, परिजनों की भूमिका पर भी उठे सवाल
कवर्धा। जिले से मानवता को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां नाबालिग बच्चों की खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चों को 5 से 6 हजार रुपये जैसी मामूली रकम में खरीदा-बेचा जा रहा था। इस मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ मामलों में परिजनों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव से कुछ नाबालिग बच्चों को बाहर ले जाकर उनसे जबरन मजदूरी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही कवर्धा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 6 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन बच्चों से कठिन परिस्थितियों में मजदूरी कराई जा रही थी। साथ ही, बेहद कम रकम में उनकी खरीद-फरोख्त किए जाने के संकेत मिले हैं।
इस मामले में चेतन यादव और रवि यादव नामक व्यक्तियों पर बैगा समुदाय के नाबालिग बच्चों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायत में उल्लेख है कि बच्चों को गांव से बाहर ले जाकर काम में लगाया गया और इसके एवज में परिजनों को पैसे दिए गए।
फिलहाल सभी रेस्क्यू किए गए बच्चों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और मनोवैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है। पुलिस बच्चों से पूछताछ कर इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि बाल तस्करी के इस नेटवर्क का जल्द खुलासा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना प्रदेश में बाल तस्करी और बाल श्रम जैसे अपराधों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर करती है, जिस पर प्रभावी रोक और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है।




