NCERT को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: “सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा, आपने गरिमा को ठेस पहुंचाई है!”

नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों में विवादास्पद सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बच्चों के दिमाग में जो जहर घोला गया है, उसके लिए केवल एक औपचारिक माफी काफी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने पाठ्यपुस्तकों में कुछ समुदायों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों पर सुनवाई करते हुए NCERT को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि किताबों में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ, उससे साफ झलकता है कि किसी की ‘गरिमा को जानबूझकर ठेस’ पहुँचाने की कोशिश की गई है।
कोर्ट की 3 बड़ी और तीखी बातें:
* माफी का खेल खत्म: कोर्ट ने कहा, “यह सिर्फ एक गलती नहीं है जिसे सॉरी बोलकर रफा-दफा कर दिया जाए। यह करोड़ों बच्चों के भविष्य और समाज की एकता का सवाल है।”
* गरिमा सर्वोपरि: अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का काम गरिमा बढ़ाना है, उसे गिराना नहीं।
* जवाबदेही तय हो: केवल सुधार कर लेना ही काफी नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी मानसिकता शिक्षा व्यवस्था में दोबारा न पनपे।
सोशल मीडिया पर मचा बवाल
जैसे ही कोर्ट की यह टिप्पणी सामने आई, सोशल मीडिया पर NCERT के खिलाफ गुस्से की लहर दौड़ गई है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इन किताबों को फाइनल करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?




