चांपा: बी़डीएम अस्पताल में जीवनदीप समिति के फंड और नियुक्तियों में मनमानी के आरोप, जांच की मांग

जांजगीर चांपा। चांपा का स्वर्गीय बिसाहूदास महंत (बी़डीएम) स्मृति शासकीय चिकित्सालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला जीवनदीप समिति के फंड के कथित दुरुपयोग और नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को भर्ती करने की तैयारियों से जुड़ा है। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन द्वारा जरूरत न होने के बावजूद नई नियुक्तियां की जा रही हैं।
फार्मासिस्ट भर्ती पर उठे सवाल
अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, बी़डीएम अस्पताल में वर्तमान में तीन नियमित फार्मासिस्ट पहले से ही पदस्थ हैं और दवाओं के वितरण का कार्य सुचारू रूप से संभाल रहे हैं। इसके बावजूद, जीवनदीप समिति के माध्यम से एक और फार्मासिस्ट की भर्ती करने की तैयारी चल रही है। जानकारों का कहना है कि यह नियुक्ति अनावश्यक है और इससे समिति के फंड पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
दंत सहायक की नियुक्ति विवादों में
अस्पताल में दंत चिकित्सा से संबंधित कार्य सीमित होने के बाद भी जीवनदीप समिति के कोटे से एक दंत सहायक की नियुक्ति कर दी गई है। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब पर्याप्त कार्य ही उपलब्ध नहीं है, तो इस पद पर भर्ती करने का क्या औचित्य है। इस निर्णय से फंड के उपयोग की पारदर्शिता पर संदेह जताया जा रहा है।
DMF कर्मचारी की दोबारा बहाली की चर्चा
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के तहत कार्यरत एक महिला कर्मचारी, जिन्हें पूर्व में हटा दिया गया था, उन्हें अब जीवनदीप समिति के माध्यम से दोबारा भर्ती करने की प्रक्रिया चल रही है। इस कदम को सीधे तौर पर पक्षपात और नियमों का उल्लंघन बताया जा रहा है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जीवनदीप समिति के फंड के इस तरह के उपयोग पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि समिति का उद्देश्य अस्पताल की सुविधाओं में सुधार और मरीजों की सहायता करना है, न कि मनमानी नियुक्तियां करना। क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।




