जाँजगीर -चाँपाधर्म भक्ति

हरदी महामाया का दिव्य चमत्कार: कपाट खुलते ही आटे पर उभरे शेर के पदचिह्न, दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

आधी रात को साक्षात पधारती हैं माँ, विज्ञान के लिए आज भी पहेली है दशकों से चला आ रहा यह रहस्य

जांजगीर-चांपा: अकलतरा विकासखंड के ग्राम हरदी स्थित माँ महामाया देवी मंदिर में बुधवार की रात एक बार फिर उस अद्भुत चमत्कार के साक्षी हजारों श्रद्धालु बने, जिसकी चर्चा पूरे अंचल में होती है। महासप्तमी के पावन अवसर पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना की गई, लेकिन भक्तों की असली प्रतीक्षा रात 12 बजे के उस क्षण के लिए थी, जब मंदिर के गर्भगृह में साक्षात माँ के वाहन ‘शेर’ के आगमन के प्रमाण मिलते हैं।

भजन-कीर्तन के बीच होता है माँ का आगमन
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह परंपरा पिछले कई दशकों से अटूट रूप से जारी है। सप्तमी की रात जब पूरा मंदिर परिसर माता के भजन-कीर्तन और ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूँज रहा होता है, तब माना जाता है कि माँ महामाया शेर पर सवार होकर सूक्ष्म रूप में गर्भगृह में प्रवेश करती हैं।

कपाट बंद… और फिर दिखा साक्षात चमत्कार
मंदिर के नियमों के अनुसार, रात 11 बजे तक पूजा का सिलसिला चलता है, जिसके बाद ट्रस्ट द्वारा मंदिर के सभी पट (दरवाजे) कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाते हैं। रात 12 बजे के बाद जैसे ही कपाट खोले गए, माता की प्रतिमा के सामने बिछाए गए आटे पर शेर के पंजे के स्पष्ट निशान दिखाई दिए। इन दिव्य पदचिह्नों की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ टूट पड़ी।

आज तक कोई नहीं जान पाया यह रहस्य’
मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह चमत्कार कब से शुरू हुआ और इसके पीछे की शक्ति क्या है, इसे आज तक कोई स्पष्ट नहीं कर पाया है। जिस वक्त पदचिह्न उभरते हैं, उस समय मंदिर के सभी द्वार भीतर से बंद होते हैं और किसी भी बाहरी व्यक्ति या जानवर के प्रवेश का कोई रास्ता नहीं होता। यह विश्वास ही है कि भक्त दूर-दूर से इस अलौकिक दृश्य को देखने खिंचे चले आते हैं।

मनोकामनाओं का केंद्र है हरदी धाम
महामाया मंदिर परिसर केवल देवी माँ ही नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ, माँ दुर्गा, राम-जानकी और साईं बाबा के मंदिरों से सुसज्जित है। सप्तमी के इस विशेष आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि तर्क और विज्ञान जहाँ समाप्त होते हैं, वहीं से श्रद्धा और विश्वास की यात्रा शुरू होती है।

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