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​डिजिटल अरेस्ट कर ₹32 लाख की ठगी का खुलासा: जांजगीर साइबर थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपी पंजाब से गिरफ्तार

टेलीकॉम और सीबीआई अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया; बैंक खाता, मोबाइल व दस्तावेज जब्त कर आरोपी को भेजा गया जेल

🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। जिले के साइबर थाना पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफ दिखाकर एक बुजुर्ग से ₹32 लाख रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य आरोपी को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी ने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी और सीबीआई का अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी थी और 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट रखकर इस वारदात को अंजाम दिया था।

कोलाबा पुलिस और CBI का डर दिखाकर की ₹32 लाख की वसूली

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, जांजगीर निवासी प्रार्थी तुषारकर देवांगन ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रार्थी के मोबाइल पर ‘विजय खन्ना’ नाम के व्यक्ति का कॉल आया, जिसने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी का अफसर बताया। कॉलर ने कहा कि प्रार्थी के मोबाइल नंबर का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में हुआ है और मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज है। इसके तुरंत बाद कथित सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो/ऑडियो कॉल किए गए और बुजुर्ग को डराकर 24 घंटे से ज्यादा समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। डर और घबराहट के माहौल में पुलिस केस रफा-दफा करने और “सेटिंग” के नाम पर आरोपियों ने बुजुर्ग से विभिन्न खातों में कुल 32 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

नंबर बंद होने पर हुआ ठगी का अहसास

रकम ट्रांसफर होने के कुछ दिनों बाद जब सभी संदिग्ध नंबर बंद आने लगे, तब प्रार्थी ने अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। ठगी का अहसास होने पर साइबर थाना जांजगीर-चांपा में अपराध क्रमांक 649/2025 धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(डी) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।

लुधियाना (पंजाब) में दबिश देकर आरोपी को दबोचा

विवेचना के दौरान जब बैंकिंग लेन-देन की पड़ताल की गई, तो ठगी की रकम इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक खाते में ट्रांसफर होना पाई गई। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर जांजगीर पुलिस की विशेष टीम पंजाब रवाना हुई। टीम ने ग्राम बल्लोवाल, थाना जोधा (जिला लुधियाना, पंजाब) में घेराबंदी कर 27 वर्षीय आरोपी शरणप्रीत सिंह उर्फ सन्नी सिंह (पिता दुर्लभ सिंह) को हिरासत में लिया।

कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने जुर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उसने अपने निजी बैंक खाते में ठगी की रकम मंगवाई थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बैंक खाते से लिंक मोबाइल नंबर, हैंडसेट, आधार कार्ड और पैन कार्ड विधिवत जब्त किए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। गौरतलब है कि साइबर जागृति अभियान के तहत जांजगीर पुलिस पिछले 2 महीनों में साइबर ठगी के 17 आरोपियों और सहयोगियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।

इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक भास्कर शर्मा, निरीक्षक अशोक वैष्णव, सउनि विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, हेड कांस्टेबल विवेक सिंह एवं आरक्षक शाहबाज की सराहनीय भूमिका रही।

⚠️ जांजगीर पुलिस की अपील:

‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम का कोई कानूनी प्रावधान नहीं पुलिस ने आम जनता को सतर्क करते हुए अपील की है कि देश के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। न तो पुलिस और न ही कोई जांच एजेंसी (CBI, ED, कस्टम आदि) कभी फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करती है। यदि कोई व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स पार्सल, नेवी या एयरपोर्ट पुलिस का अधिकारी बनकर केस का डर दिखाए या पैसे की मांग करे, तो बिल्कुल न घबराएं और तुरंत नजदीकी थाने या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

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