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मुरिया दरबार में भावुक हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु: बोलीं- मैं भी मांझी की बेटी हूं, आदिवासी परंपराएं सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण

ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में शामिल हुईं महामहिम; नक्सलवाद के खिलाफ एकजुटता और विकास के साथ संस्कृति बचाने का दिया संदेश

🔴 आज की बात News | जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ऐतिहासिक बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, सामूहिकता और परंपरागत न्याय प्रणाली की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि समय के साथ शासन व्यवस्थाएं और नीतियां बदलती रहीं, लेकिन आदिवासी समाज ने अपने अलिखित संविधान और परंपराओं को पीढ़ियों से जीवंत रखा है, जो सामाजिक एकता, न्याय और सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

मैं भी मांझी की बेटी हूं, अपनी जड़ों से गहरा जुड़ाव

मुरिया दरबार में पारंपरिक प्रमुखों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि वे भी इसी समाज और संस्कृति से आती हैं। उनके दादाजी, पिताजी और भाई भी मांझी रहे हैं। वे स्वयं एक मांझी यानी गांव के मुखिया की बेटी हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य भले आज साथ न हों, लेकिन समाज की परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति उनका भावनात्मक जुड़ाव आज भी अटूट है।

पारंपरिक न्याय प्रणाली से सीखे समाज, आपसी सहमति से सुलझाएं विवाद

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समाज में मांझी, पीड़ परगना और देश परगना के जरिए विवादों को सुलझाने की समृद्ध परंपरा रही है, जहां मिल-बैठकर सर्वसम्मति से निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने आधुनिक न्यायिक व्यवस्था में अदालती मुकदमों में लगने वाले लंबे समय और खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां तक संभव और कानूनसम्मत हो, समाज के लोग आपसी संवाद और पारंपरिक व्यवस्था के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालें।

नक्सलवाद के खिलाफ एकजुटता का आह्वान, बहकावे में न आने की सलाह

नक्सलवाद की चुनौती पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बाहरी ताकतों के बहकावे में आने के बजाय समाज को अपने भविष्य के फैसले स्वयं लेने चाहिए। यदि कोई समाज में अशांति फैलाने का प्रयास करता है, तो एकजुट होकर उसका मुकाबला करें। संगठित समाज को कोई भी बुरी ताकत कमजोर नहीं कर सकती।

शिक्षा और आधुनिक विकास अपनाएं, पर सांस्कृतिक पहचान न खोएं

राष्ट्रपति मुर्मु ने बच्चों की उच्च शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। आधुनिक शिक्षा और नई सोच को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक पहचान, भाषा और रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पारंपरिक काष्ठ कलाकृति स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, विधायक किरण सिंह देव, महापौर संजय पाण्डे सहित बस्तर दशहरा समिति के सदस्य, मांझी-चालकी और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

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