क्राइमजाँजगीर -चाँपा

साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार: ₹18.17 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी में चांपा पुलिस को मिली सफलता

समन्वय पोर्टल के इनपुट पर कार्रवाई; पूर्व में महिला समेत दो आरोपी जा चुके हैं जेल, आरोपियों के खातों में ट्रांसफर हुई थी ठगी की रकम

🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। जिले के चांपा थाना क्षेत्र में म्यूल बैंक खातों के जरिए देशभर में साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने वाले गिरोह के एक फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी कमीशन के लालच में बैंक खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को मुहैया कराता था। इस मामले में पूर्व में एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है।

समन्वय पोर्टल से खुला राज, ₹18.17 लाख का हुआ था फर्जीवाड़ा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (समन्वय पोर्टल) से प्राप्त इनपुट के आधार पर चांपा पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन की गहन जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि गिरोह द्वारा विभिन्न राज्यों में ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी कर कुल ₹18,17,216 (18 लाख 17 हजार 216 रुपये) की ठगी की गई थी। यह पूरी रकम आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाई गई थी।

कमीशन के लालच में बेचे जा रहे थे खाते

विवेचना के दौरान खुलासा हुआ कि आरोपी भोले-भाले लोगों और युवाओं को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद उसकी पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और ऑनलाइन क्रेडेंशियल्स साइबर अपराधियों तक पहुंचा दिए जाते थे, जिनका इस्तेमाल अवैध लेन-देन और ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किया जाता था।

फरार आरोपी सक्ती जिले से गिरफ्तार

मामले में फरार चल रहे आरोपी शुभम भारद्वाज (उम्र 22 वर्ष, निवासी छोटेकोट, थाना मालखरौदा, जिला सक्ती) की लगातार तलाश की जा रही थी। पुलिस ने मुखबिर की सूचना और तकनीकी लोकेशन के आधार पर घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आवश्यक पूछताछ के बाद आरोपी को विधिवत न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार सेन्डे, प्रधान आरक्षक सुनील सिंह एवं चांपा थाना स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?

म्यूल अकाउंट (Mule Account) वह बैंक खाता होता है, जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या चंद रुपयों के लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए दे देता है। साइबर ठग ऐसे खातों का उपयोग ठगी की रकम को ठिकाने लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते हैं ताकि मुख्य आरोपियों की पहचान छिपी रहे। कानून के तहत ऐसा खाता उपलब्ध कराने या बेचने वाला व्यक्ति भी साइबर अपराध का सीधा हिस्सेदार माना जाता है।

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