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कोयले की डस्ट से जांजगीर-नैला में सांस लेना हुआ दूभर, रॉयल्टी वसूली में मस्त विभाग! पर्यावरण स्वीकृति की जांच की मांग

रातभर दौड़ते भारी वाहनों से घरों पर छाई कालिख, खनिज विभाग और प्रशासन की चुप्पी से नगरवासियों में भारी आक्रोश

जांजगीर-चांपा। 29 अगस्त 2026। जांजगीर-नैला शहर में रातभर बेरोकटोक दौड़ने वाले भारी कोयला वाहनों ने नगर की व्यवस्था और पर्यावरण को पूरी तरह तबाह कर दिया है। आरोप है कि खनिज विभाग नियमों की अनदेखी कर सिर्फ रायल्टी वसूली में लगा है, जिसके चलते भारी वाहनों को रिहायशी इलाकों से गुजरने की खुली छूट मिली हुई है। स्थानीय प्रशासन, नगरपालिका और खनिज विभाग की चुप्पी के कारण सुबह होते ही मुख्य मार्गों पर उड़ती कोयले की डस्ट से आम नागरिकों का चलना दूभर हो चुका है।

घरों में घुसी कालिख, खड़े वाहन हुए मैले

परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। भारी वाहन बिना ठीक से ढंके कोयला लेकर शहर के बीच से गुजर रहे हैं, जिससे उड़ने वाली डस्ट लोगों के घरों, दुकानों और बाहर खड़े दोपहिया व चारपहिया वाहनों पर जम रही है। लगातार हो रहे इस प्रदूषण से शहरवासियों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों में विभाग की लापरवाही के खिलाफ गहरा आक्रोश है।

फेफड़ों में जमा हो रहे कण

हवा में घुल रहे कोयले के बारीक कण सांसों के जरिए सीधे लोगों के फेफड़ों में जमा हो रहे हैं, जिससे दमा, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी गंभीर बीमारियां पैर पसार रही हैं। नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण आम जनता के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है।

पर्यावरण स्वीकृति और नियमों की हो उच्चस्तरीय जांच

शहरवासियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे कोयला परिवहन के लिए जारी पर्यावरण स्वीकृति (Environment Clearance) और तय रूट चार्ट की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए रिहायशी इलाकों से भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव सुनिश्चित किया जाए।

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