खेती-किसानी छोड़ सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर अन्नदाता: कोटेतरा में नहीं बैठ रहे पटवारी, दिनभर इंतजार कर बैरंग लौट रहे ग्रामीण

मुख्यालय से पटवारी के नदारद रहने से गिरदावरी, सीमांकन और केसीसी जैसे अहम काम ठप; आक्रोशित ग्रामीणों ने दी एसडीएम से शिकायत की चेतावनी
🔴 आज की बात News | जैजैपुर। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद कि सभी मैदानी राजस्व कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय में रहकर आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करेंगे, जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत कोटेतरा हल्का मुख्यालय में पदस्थ पटवारी के नियमित रूप से न बैठने के कारण क्षेत्र के किसान और ग्रामीण भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी के मुख्यालय पर उपस्थित न रहने से उन्हें तहसील कार्यालय या उनके निजी निवास के चक्कर काटने को विवश होना पड़ रहा है।
गिरदावरी से लेकर केसीसी तक के जरूरी काम अटके
वर्तमान में खेती-किसानी का सीजन चरम पर है, जिसके चलते किसानों को कई महत्वपूर्ण राजस्व दस्तावेजों की तत्काल आवश्यकता है। पटवारी की अनुपस्थिति के कारण खरीफ फसल की गिरदावरी का सत्यापन, जमीन का नामांतरण, फौती, बटवारा, सीमांकन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी तरह ठप पड़ गई है। दूर-दराज के गांवों से जरूरी काम लेकर कोटेतरा पहुंचने वाले किसान दिनभर इंतजार करने के बाद मायूस होकर बैरंग लौटने को मजबूर हैं, जिससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद हो रहा है।
खेती का काम छोड़ दफ्तरों के चक्कर काट रहे किसान
समस्या से त्रस्त स्थानीय किसानों ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि पटवारी साहब कब आते हैं और कब चले जाते हैं, इसका कोई तय समय नहीं रहता। कई बार फोन के माध्यम से संपर्क साधने का प्रयास करने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। किसानों का कहना है कि यदि यही ढर्रा जारी रहा तो वे खेतों में काम करने के बजाय सिर्फ सरकारी दफ्तरों और पटवारी के चक्कर ही काटते रह जाएंगे, जिसका सीधा असर उनकी खेती और आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने दी एसडीएम और तहसीलदार से शिकायत की चेतावनी
पटवारी की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि जल्द ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) और तहसीलदार को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कोटेतरा मुख्यालय में पटवारी के बैठने के दिन और समय को सार्वजनिक रूप से निर्धारित किया जाए तथा अपने दायित्वों के प्रति लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।




