
देशी, विदेशी और महुआ शराब की उपलब्धता से ग्रामीण चिंतित; युवाओं और कम उम्र के बच्चों पर नशे का असर बढ़ने की आशंका, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
🔴 आज की बात | सक्ती। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध देशी, विदेशी और हाथ से बनी महुआ शराब की बिक्री को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होने के कारण युवा और कम उम्र के बच्चे भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। इसका असर गांवों के सामाजिक माहौल और आपसी शांति पर दिखाई देने लगा है।
कार्रवाई के बाद फिर शुरू हो जाता है कारोबार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, अवैध शराब की बिक्री की शिकायत मिलने पर पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद संबंधित कारोबारी फिर सक्रिय हो जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि छिटपुट कार्रवाई और जुर्माने से इस कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग पा रही है।उनका कहना है कि बार-बार पकड़े जाने के बावजूद अवैध शराब बेचने वालों का दोबारा कारोबार शुरू कर देना कानून के डर और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण अब ऐसी कार्रवाई चाहते हैं, जिससे अवैध बिक्री पर लगातार निगरानी रखी जा सके और दोबारा कारोबार शुरू करने वालों पर प्रभावी कानूनी कदम उठाए जाएं।
नशे के पैसे जुटाने के लिए छोटी घटनाओं का खतरा
ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि नशे की लत पूरी करने के लिए कुछ युवक कथित तौर पर घरों और दुकानों में छोटी-मोटी चोरियों जैसी घटनाओं में शामिल हो रहे हैं। राह चलते लोगों से विवाद, गाली-गलौज और मारपीट की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि समय रहते अवैध शराब की बिक्री और नशे की समस्या पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो ऐसी घटनाएं आगे चलकर गंभीर अपराधों का रूप ले सकती हैं। उनका मानना है कि इस स्थिति का सबसे अधिक नुकसान युवाओं और बच्चों के भविष्य को हो सकता है।
आदतन शराब कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस-आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि अवैध शराब बेचने वाले आदतन कोचियों और तस्करों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी एवं नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने बार-बार अपराध में संलिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कदम उठाने और जरूरत के अनुसार जिला बदर जैसी कार्रवाई पर विचार करने की मांग भी की है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायत मिलने पर छिटपुट कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब के ठिकानों पर नियमित निगरानी और निरंतर कार्रवाई जरूरी है, ताकि गांवों में इस कारोबार पर प्रभावी रोक लग सके।



