रायपुर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन: विधानसभा घेराव कर पायलट और बघेल ने केंद्र-राज्य सरकार पर बोला हमला

रायपुर (डिजिटल डेस्क): छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज कांग्रेस ने अपनी ताकत का अहसास कराया। मनरेगा के अस्तित्व को बचाने, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस ने ‘विधानसभा घेराव’ कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने किया।
भारत माता चौक पर हुंकार
घेराव से पहले शंकर नगर स्थित भारत माता चौक पर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। सभा में प्रदेश भर से आए हजारों कार्यकर्ताओं के जोश ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस आने वाले समय में सड़कों पर संघर्ष तेज करेगी।
सचिन पायलट का प्रहार: “गरीबों का हक मार रही सरकार”
प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार मिलकर गरीबों के अधिकारों पर हमला कर रही है। उन्होंने कहा: “मनरेगा जैसी योजना जो संकट के समय ग्रामीणों का सहारा थी, उसे केंद्र सरकार ने बजट कटौती और नियमों में उलझाकर कमजोर कर दिया है। यह सरकार केवल चुनिंदा उद्योगपतियों के दबाव में काम कर रही है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।”
भूपेश बघेल ने उठाए ज्वलंत मुद्दे:
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महंगाई और गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज गैस सिलेंडर की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। बघेल ने प्रदेश में कानून व्यवस्था और नशे (अफीम की खेती) के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और सरकार सुशासन के नाम पर केवल जुमलेबाजी कर रही है।
दीपक बैज और महंत ने भरी हुंकार
दीपक बैज (PCC अध्यक्ष): “बिजली बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी और बेरोजगारी ने युवाओं को सड़क पर ला दिया है। किसानों को धान का बोनस और सही कीमत देने के वादे अधूरे हैं।”
चरणदास महंत (नेता प्रतिपक्ष): “विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कांग्रेस डरने वाली नहीं है। हम जनता के हक की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ेंगे।”
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, जगह-जगह बैरिकेडिंग
कांग्रेस के इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। विधानसभा की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।




