Chhattisgarhजाँजगीर -चाँपा

पीईटी परीक्षा में अव्यवस्था : मिन्नतें करते रहे छात्र, नहीं पसीजा कर्मचारियों का दिल, कई विद्यार्थियों का सपना टूटा

टीसीएल कॉलेज परीक्षा केंद्र में प्रवेश से रोके गए परीक्षार्थी, कर्मचारियों की सख्ती और अव्यवस्था से छात्रों का एक साल दांव पर

जांजगीर-चांपा। जिले में आयोजित प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट (पीईटी) के दौरान गुरुवार को अव्यवस्था और कर्मचारियों की कथित मनमानी के चलते कई छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया। जांजगीर स्थित टीसीएल कॉलेज परीक्षा केंद्र में दर्जनों परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने से छात्रों और परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि समय पर पहुंचने के बावजूद उन्हें परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया।

व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक पीईटी परीक्षा आयोजित की गई थी। टीसीएल कॉलेज केंद्र में लगभग 360 परीक्षार्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में अभ्यर्थी केंद्र पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट और चैनल गेट पर तैनात कर्मचारियों एवं सुरक्षा कर्मियों के रवैये के कारण कई छात्र परीक्षा से वंचित रह गए।

शर्ट के रंग को लेकर रोका, फिर देर का हवाला देकर लौटाया

ग्राम हरदी निवासी परीक्षार्थी युवराज ने बताया कि वह सुबह लगभग 9:15 बजे परीक्षा केंद्र पहुंच गया था। आरोप है कि गेट पर तैनात कर्मचारियों ने उसकी शर्ट का रंग गहरा होने की बात कहकर उसे प्रवेश नहीं दिया। इसके बाद उसने दूसरी शर्ट की व्यवस्था की और करीब 9:32 बजे दोबारा केंद्र पहुंचा, लेकिन तब कर्मचारियों ने देरी का हवाला देते हुए प्रवेश से मना कर दिया।

युवराज के मुताबिक उसने पीईटी परीक्षा की तैयारी के लिए एक वर्ष का ड्रॉप लिया था और पूरे साल मेहनत की थी। परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने से उसका एक और साल प्रभावित हो गया।

कई बार अनुरोध करने के बाद भी नहीं मिली अनुमति

जांजगीर निवासी उन्नति साहू ने बताया कि वह इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए पिछले कुछ महीनों से दुर्ग में रह रही थीं। परीक्षा देने के लिए वह एक दिन पहले जांजगीर पहुंचीं। उन्नति का कहना है कि वह सुबह 9:30 बजे तक परीक्षा केंद्र पहुंच चुकी थीं और मुख्य गेट पार कर चैनल गेट तक भी पहुंच गई थीं, लेकिन वहां तैनात कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार अनुरोध करने और भविष्य बर्बाद होने की बात कहने के बावजूद किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और उन्हें वापस भेज दिया गया।

जांच और कार्रवाई की मांग

परीक्षार्थियों और उनके परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का कहना है कि यदि वे निर्धारित समय के भीतर केंद्र पहुंच गए थे, तो उन्हें परीक्षा से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।

इस घटना के बाद परीक्षा केंद्रों की व्यवस्थाओं, संवेदनशीलता और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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