हरप्रसाद निडर को उपन्यास गरीबा के लिए राष्ट्रीय साहित्य सम्मान

निडर अब तक के 20 से अधिक पुस्तकों की कर चुके हैं रचना
जांजगीर-चाम्पा। जिले के सुप्रसिद्ध कवि, कथाकार एवं साहित्यकार हरप्रसाद निडर को उनके चर्चित उपन्यास गरीबा के लिए सरस्वती साहित्य संगम, रावतसर (राजस्थान) द्वारा स्वर्गीय बद्री प्रसाद चांडक स्मृति साहित्य सृजक सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें हिंदी साहित्य में उनके दीर्घकालीन योगदान, सशक्त लेखन और समाजोन्मुख रचनाओं के लिए प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। हरप्रसाद निडर छत्तीसगढ़ी और हिंदी साहित्य के ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से आम जनजीवन, ग्रामीण संवेदना, सामाजिक यथार्थ और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उनका उपन्यास गरीबा समाज के वंचित, उपेक्षित और संघर्षशील वर्ग की पीड़ा, संघर्ष और आत्मसम्मान की कथा को गहराई से उकेरता है। इसी संवेदनशील और यथार्थपरक प्रस्तुति के कारण यह कृति साहित्यिक जगत में विशेष रूप से सराही गई। श्री निडर अब तक 20 से अधिक पुस्तकों की रचना कर चुके हैं, जिनमें कविता, कहानी, उपन्यास, डायरी, दोहे और छत्तीसगदी साहित्य की विविध विधाएँ शामिल हैं। उनकी रचनाएँ सरल भाषा में गहरी बात कहने की क्षमता रखती हैं, जिससे वे पाठकों के हृदय तक सीधे पहुँच बनाती है। उनकी प्रमुख एवं चर्चित कृतियों में भारत माता धरती दाई, निडर की कुंडलिया, छत्तीसगढ़ दर्शन, गीत निडर के गाता चल, निडर के दोहे, ‘निडर की डायरी” सहित अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं। इन कृतियों में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय भावना का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। श्री हरप्रसाद निडर केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि एक समर्पित शिक्षक भी रहे हैं। वे एक सेवानिवृत्त व्याख्याता हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2014 में छतीसगढ़ राज्यपाल द्वारा राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अतिरिक्त गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा वर्ष 2017 में गुरु घासीदास कुल उत्सव सम्मान प्रदान किया गया, जो उनके अकादमिक एवं साहित्यिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक है। वहीं वर्ष 2021 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उन्हें भाषा विशेषज्ञ सम्मान से अलंकृत किया गया। इनके अलावा भी श्री निडर को देश की विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं द्वारा दर्जनों सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी रचनाएँ अनेक साहित्यिक मंचों, पत्र-पत्रिकाओं और संगोष्ठियों में निरंतर चर्चित रही हैं।




