युवा शक्ति से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के 36 युवा फेलोज से सीएम विष्णु देव साय का आत्मीय संवाद; साझा किए बचपन के संघर्ष और खेती के अनुभव

निष्ठा, संवेदनशीलता और जनसेवा को बनाएं जीवन का ध्येय; आईआईएम रायपुर में ट्रेनिंग के बाद 19 महीने जिलों में फील्ड वर्क करेंगे युवा

🔴 आज की बात News | रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के द्वितीय बैच के 36 युवा प्रतिभागियों से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं के सवालों के सहज उत्तर दिए और अपने छात्र जीवन, पारिवारिक जिम्मेदारियों, बचपन के संघर्ष से लेकर जनसेवा और सार्वजनिक जीवन तक के प्रेरक अनुभव साझा किए। उन्होंने युवा फेलोज से आह्वान किया कि वे इस फेलोशिप का उपयोग केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली समझने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ज्ञान, नवाचार और कौशल से जनजीवन में ठोस सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें।
’10 वर्ष की उम्र में सिर से उठा पिता का साया, खुद बैलों से चलाया हल’
संवाद के दौरान जब प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन की प्रेरणाओं के बारे में पूछा, तो सीएम साय भावुक स्मृतियों में लौट गए। उन्होंने बताया कि महज दस वर्ष की उम्र में पिता के आकस्मिक निधन के बाद पूरे परिवार का भार उनके कंधों पर आ गया था। चार भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते मां, दादी और छोटे भाइयों की देखरेख के साथ-साथ उन्हें कम उम्र में ही खेती-बाड़ी संभालनी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने खुद बैलों से हल चलाने सहित खेती के सारे काम किए हैं। उन कठिन परिस्थितियों ने मुझे बचपन में ही श्रम, जिम्मेदारी और मुश्किलों से लड़ना सिखा दिया।” उन्होंने बताया कि कभी सोचा भी नहीं था कि वे सरपंच बनेंगे, लेकिन निर्विरोध सरपंच बनने के बाद विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और अब मुख्यमंत्री के रूप में सेवा का दायरा बढ़ता गया। उन्होंने स्वर्गीय श्री दिलीप सिंह जूदेव के धैर्य, सहजता और जनसरोकार को अपनी राजनीति का बड़ा प्रेरणास्रोत बताया।
विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के विजन में युवा निर्णायक

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा, “युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है। युवाओं के पास ऊर्जा, प्रतिभा और नए विचार हैं। जब यह शक्ति जनकल्याण से जुड़ती है तो व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आता है।” उन्होंने फेलोज को निर्देश दिया कि वे जिलों में फील्ड पोस्टिंग के दौरान स्थानीय जमीनी हकीकत और जनता की प्राथमिकताओं को समझें। विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर डेटा और तथ्यों के आधार पर ऐसे व्यावहारिक सुझाव तैयार करें, जिससे सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक डिलीवरी और ज्यादा प्रभावी हो सके।
शिक्षा की लंबी यात्रा: बोरे की चटाई से लेकर IIM-IIT और AI मिशन तक
सीएम साय ने अपने छात्र जीवन के दौर की तुलना वर्तमान से करते हुए कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं नगण्य थीं। उन्हें 5वीं बोर्ड की परीक्षा देने 6 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता था और बच्चे घर से जूट का बोरा या चटाई लेकर स्कूल जाते थे।
उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एम्स और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जैसे शीर्ष संस्थान मौजूद हैं। राज्य सरकार अब भविष्य की तकनीक के लिए 500 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ ‘एआई मिशन’ शुरू कर रही है, जिसके तहत 6 लाख छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शिक्षा और 1,500 अधिकारियों-कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

निवेश समझौतों को धरातल पर उतारकर रोजगार सृजन की तैयारी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल एमओयू (इन्वेस्टमेंट प्रपोजल) साइन करना नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर रोजगार के नए अवसर बनाना है। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय युवाओं, महिला उद्यमियों और एससी/एसटी वर्ग को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। सिंगापुर प्रवास का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश की खनिज संपदा, वनोपज और उद्योग-अनुकूल नीतियों के दम पर सेमीकंडक्टर और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों में बड़ा निवेश आ रहा है। इसके साथ ही नवा रायपुर में 100 एकड़ में प्रस्तावित ‘मेडिसिटी’ और 5 हजार बिस्तरों के अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार का बड़ा हब तैयार होगा।
कैट (CAT) स्कोर से हुआ 36 फेलोज का चयन, 14 जिलों का प्रतिनिधित्व

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव तथा मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत ने बताया कि मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप का संचालन आईआईएम रायपुर और ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ के सहयोग से किया जा रहा है। कैट स्कोर और साक्षात्कार के आधार पर चयनित 36 युवाओं में दंतेवाड़ा, बस्तर और जशपुर सहित 14 जिलों के युवा शामिल हैं।
यह दो वर्षीय फेलोशिप 5 माह के क्लासरूम प्रशिक्षण (आईआईएम रायपुर) और 19 माह के गहन फील्ड वर्क पर आधारित है। कार्यक्रम में आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रो. संजीव पराशर, सुशासन विभाग के उप सचिव श्री सूरज साहू सहित वरिष्ठ अधिकारी और युवा फेलो उपस्थित रहे।




