धनतेरस आज: भगवान धन्वंतरि की पूजा से शुरू होगा दीपोत्सव, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक महत्व

सोना-चांदी और नए बर्तनों की खरीदारी का विशेष महत्व, शाम को मां लक्ष्मी-कुबेर पूजन के साथ होगा यम दीपदान
🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का शुभारंभ आज शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस के साथ हो रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर सोना-चांदी, पीतल और अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। वहीं शाम को घर के बाहर यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है।
धनतेरस 2026: त्रयोदशी तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज 6 नवंबर को त्रयोदशी तिथि सुबह 10:31 बजे से शुरू होगी जो शनिवार 7 नवंबर को सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण धनतेरस का पर्व आज ही मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार आज सूर्यास्त शाम 5:25 बजे होगा। प्रदोष काल शाम 5:25 बजे से रात 7:58 बजे तक रहेगा। वहीं पूजा का विशेष शुभ मुहूर्त शाम 5:58 बजे से रात 7:56 बजे तक है। यह समय प्रदोष काल और वृषभ लग्न के संयोग का है।
धनतेरस पर कैसे करें पूजा?
धनतेरस के दिन सुबह घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल तैयार करें। शाम को शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव का पूजन करें। पूजा के लिए दीपक, धूप, फूल, अक्षत, रोली, फल और मिठाई रखें। सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण कर पूजा शुरू करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि को पुष्प अर्पित कर अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना करें। मां लक्ष्मी और कुबेर देव को धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
यम दीपदान का क्या है महत्व?
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर परिवार की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर सोना, चांदी, तांबे, पीतल और स्टील के बर्तन खरीदने की परंपरा है। कई परिवार इस दिन चांदी के सिक्के, आभूषण और घर के उपयोग की नई वस्तुएं भी खरीदते हैं। इसके अलावा धनिया और नई झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक मानी जाती हैं। हालांकि खरीदारी करना अनिवार्य नहीं है, श्रद्धापूर्वक पूजा करना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समुद्र मंथन से जुड़ी है धनतेरस की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसी कारण धनतेरस पर उनकी पूजा कर लोग अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
एक अन्य प्रचलित पौराणिक कथा राजा हिम के पुत्र से जुड़ी है। मान्यता है कि विवाह के चौथे दिन उनकी मृत्यु का योग था। उनकी पत्नी ने रातभर घर में दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषणों को द्वार पर रख दिया। जब यमराज सर्प के रूप में वहां पहुंचे तो दीपों और आभूषणों की चमक से आगे नहीं बढ़ सके। इसी कथा को यम दीपदान की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
धनतेरस केवल धन-संपत्ति की खरीदारी का पर्व नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना का अवसर भी है। इसी के साथ दीपावली के उत्सव की शुरुआत हो रही है।



