दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने बचाई नवजात की जान, 7 दिन वेंटिलेटर पर चली जिंदगी की जंग

जन्म के बाद बिगड़ी थी हालत, एक माह के इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटी बच्ची
🔴 Aaj Ki Baat News | रायपुर/दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा जिला अस्पताल के चिकित्सकों और विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) की टीम ने एक गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्ची को नया जीवन देकर मानव सेवा और चिकित्सकीय समर्पण की मिसाल पेश की है। सात दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझने के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट गई।
जन्म के बाद अचानक बिगड़ी थी तबीयत
गीदम विकासखंड के पदमेटा स्कूलपारा निवासी मंजू अलामी ने 10 मई को एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के तुरंत बाद नवजात को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। इसके साथ ही शरीर में शुगर का स्तर लगातार गिर रहा था और उसे बार-बार झटके आ रहे थे। बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक थी।
जिला अस्पताल में ही शुरू किया गया इलाज
गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञों ने बच्ची को तत्काल विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कर उपचार शुरू किया। हालत को देखते हुए उसे अन्यत्र रेफर करना भी जोखिम भरा माना गया।
7 दिन वेंटिलेटर पर रही नवजात
चिकित्सकों ने नवजात को लगातार सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। इस दौरान डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने चौबीसों घंटे निगरानी करते हुए उपचार जारी रखा। लगातार प्रयासों और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन से बच्ची की हालत में सुधार होने लगा।
एक महीने बाद स्वस्थ होकर मिली छुट्टी
करीब एक माह तक चले उपचार और विशेष देखभाल के बाद 13 जून को बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने इसे जिला चिकित्सालय की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का उदाहरण
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने कहा कि गंभीर अवस्था में भर्ती नवजात को वेंटिलेटर सपोर्ट के जरिए नया जीवन देना जिला अस्पताल की नवजात चिकित्सा सेवाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह डॉक्टरों के समर्पण और जिले में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है।




