भारत माला घोटाले पर ED का बड़ा शिकंजा! रायपुर में जमीन कारोबारी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे

500 करोड़ से ज्यादा मुआवजा गड़बड़ी के आरोप, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही जांच एजेंसी
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतमाला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनके सहयोगियों के आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। सुबह तड़के पहुंची टीम अभनपुर स्थित आवास और दफ्तर में दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच में जुटी रही।
500 करोड़ से अधिक गड़बड़ी के संकेत
जांच एजेंसियों के अनुसार रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। आरोप है कि मुआवजा प्रक्रिया का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर आर्थिक गड़बड़ी की गई।
मुआवजा घोटाले का तरीका
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कृषि भूमि को बैकडेट में गैर-कृषि घोषित कर मुआवजा कई गुना बढ़ाया गया। राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों जैसे एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी पर जमीन दलालों के साथ मिलीभगत के आरोप हैं। एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग नामों पर मुआवजा जारी किया गया, जिससे कुल रकम कई गुना बढ़ गई।
पहले भी हो चुकी कार्रवाई
इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और ED पहले भी कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी हैं। जांच के दौरान करोड़ों की संपत्तियां अटैच की गईं और 40 लाख रुपये से अधिक नकदी जब्त की जा चुकी है। तत्कालीन SDO निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
चार्जशीट के बाद जांच तेज
EOW ने इस प्रकरण में 10 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिनमें सरकारी अधिकारी और जमीन कारोबारी शामिल हैं। अब ED इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें बैंक लेन-देन, फर्जी दस्तावेज और डिजिटल ट्रेल की पड़ताल की जा रही है।
परियोजना की साख पर सवाल
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में सामने आई इस गड़बड़ी ने पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं विकास परियोजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं।




