वैशाख पूर्णिमा आज: बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और नियम

भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण की तिथि; स्नान-दान और साधना का विशेष दिन
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान, दान और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी तथा चंद्रदेव की पूजा का विधान है। लेकिन वैशाख माह की पूर्णिमा को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (ज्ञानोदय) और महापरिनिर्वाण हुआ था। हिंदू परंपरा में भगवान विष्णु का नौवां अवतार भी इसी दिन बुद्ध के रूप में माना जाता है। इस दिन करुणा, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया जाता है।
शुभ मुहूर्त (Buddha Purnima 2026 Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:16 बजे से 04:57 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: 11:52 बजे से 12:45 बजे तक
विजय मुहूर्त: 02:31 बजे से 03:24 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:55 बजे से 07:17 बजे तक
अमृत काल: शाम 06:56 बजे से रात 08:41 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:57 बजे से 12:39 बजे तक
दान-पुण्य का विशेष महत्व
बुद्ध पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएं दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दही, चीनी आदि का दान विशेष शुभ माना गया है। इसके साथ ही जल से भरा घड़ा, फल, पंखा और छाता दान करना भी पुण्यकारी बताया गया है।
इस दिन क्या करें
तुलसी के सामने घी का दीपक जलाएं
पीपल के वृक्ष के पास दीपदान करें
भगवान को दही-चावल का भोग लगाएं
शांत मन से ध्यान और पूजा करें
क्या न करें (नियम)
झूठ बोलने से बचें
किसी का अपमान न करें
तामसिक भोजन से दूर रहें
क्रोध और नकारात्मकता से बचें
भगवान बुद्ध का जीवन संदेश
भगवान बुद्ध का जीवन त्याग, साधना और सत्य की खोज का प्रतीक है। उन्होंने सिखाया कि वास्तविक शांति और सुख हमारे भीतर ही निहित है। उनके अनुसार, व्यक्ति को पहले स्वयं पर विजय प्राप्त करनी चाहिए, तभी वह सच्चे अर्थों में सफल और संतुष्ट हो सकता है।
प्रेरणादायक विचार
“क्रोध को प्रेम से और बुराई को अच्छाई से जीता जा सकता है।”
“समझदार व्यक्ति न प्रशंसा से प्रभावित होता है, न आलोचना से।”
“असली खुशी भीतर से आती है, बाहरी वस्तुओं से नहीं।”




