श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, भारत राइस मिल परिसर में उमड़ा आस्था का सैलाब

बसईवाल परिवार द्वारा आयोजित पितृ मोक्षार्थ श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर वामन अवतार व कृष्ण प्राकट्य का भावपूर्ण वर्णन
🔴 आज की बात News | जांजगीर-नैला। नैला स्थित भारत राइस मिल परिसर में बसईवाल परिवार द्वारा आयोजित सप्त-दिवसीय पितृ मोक्षार्थ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। कथा व्यास परम पूज्य गोस्वामी गोविंद बाबा जी महाराज (मथुरा-वृंदावन) के श्रीमुख से राजा बलि, वामन अवतार और भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
वामन अवतार और रक्षाबंधन की कथा
कथा प्रसंग सुनाते हुए पूज्य गोविंद बाबा ने कहा कि असुरराज महाबली राजा बलि अत्यंत दानी, धर्मपरायण और प्रजा-वत्सल थे। देवताओं की चिंता दूर करने भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर तीन पग भूमि मांगी और दो पग में त्रिलोकी नाप ली। तीसरे पग में राजा बलि ने स्वयं का शीश समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रभु ने उन्हें पाताल का राज्य सौंपा और स्वयं द्वारपाल बने। बाद में माता लक्ष्मी ने बलि को रक्षा-सूत्र बांधकर भाई बनाया और भगवान विष्णु को वैकुंठ वापस लाने का वरदान मांगा, जिससे रक्षाबंधन पर्व का आरंभ हुआ।

जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब कान्हा का प्राकट्य प्रसंग आया, तो समूचा पंडाल ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के बाल स्वरूप का जीवंत दर्शन किया और ‘हरे कृष्ण’ की धुन पर जमकर झूमे। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला दिव्य ग्रंथ है, जो कठिन परिस्थितियों में धर्म, करुणा, विनम्रता और कर्तव्य का मार्ग दिखाता है।
कथा श्रवण करने पहुंचे गणमान्य जन
इस धार्मिक अनुष्ठान में राजेश्री डॉ. रामसुंदर दास महंत, पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय, ठा श्रवण सिंह, निर्मल दास वैष्णव कमलेश सिंह, मनोज कुमार मित्तल एवं शशिभूषण सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा रसपान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।





