UPI पर शुल्क लगाना ‘डिजिटल इंडिया’ की नीति के विपरीत, केंद्र सरकार का यह कदम जनविरोधी: कांग्रेस

₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर MDR लगाने पर भड़के कांग्रेस प्रवक्ता नागेंद्र गुप्ता, फैसले पर पुनर्विचार की मांग
🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा ₹2,000 से अधिक के यूपीआई (UPI) व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के निर्णय पर जिला कांग्रेस कमेटी जांजगीर-चांपा के महामंत्री एवं प्रवक्ता नागेंद्र गुप्ता ने कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का जनविरोधी कदम करार देते हुए सवाल उठाया कि एक ओर सरकार देश को कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर शुल्क लगाने का रास्ता खोलना उसकी अपनी ‘डिजिटल इंडिया’ नीति के पूरी तरह विपरीत है।
कैशलेस व्यवस्था अपना चुके व्यापारियों में अतिरिक्त लागत को लेकर चिंता
नागेंद्र गुप्ता ने कहा कि नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने देशवासियों को डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन लेनदेन और कैशलेस अर्थव्यवस्था अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया था। इसका परिणाम यह रहा कि आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े व्यापारी तक क्यूआर कोड और यूपीआई भुगतान को अपनी रोजमर्रा की व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बना चुके हैं। ऐसे समय में ₹2,000 से अधिक के व्यापारी लेनदेन पर MDR लगाने से व्यापारियों के बीच अतिरिक्त वित्तीय लागत को लेकर गंभीर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है।
दुकानदारों द्वारा नकद लेनदेन को बढ़ावा देने की आशंका, नीति पर पड़ेगा असर
कांग्रेस प्रवक्ता ने विस्तार से बताते हुए कहा कि राशन, कपड़ा, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना-चांदी, घरेलू सामान तथा अन्य बड़े मूल्य की खरीदारी में आम नागरिक व ग्राहक बड़े पैमाने पर यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। यदि व्यापारियों को प्रत्येक बड़े डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क वहन करना पड़ेगा, तो कई व्यापारी ग्राहकों को फिर से नकद भुगतान के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। इससे सरकार के ‘कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था’ (Less-Cash Economy) के मूल लक्ष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
2017 के नियमों की दिलाई याद, निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार की मांग
उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि वर्ष 2017 में स्वयं केंद्र सरकार ने ₹2,000 तक के भीम-यूपीआई (BHIM-UPI) और डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR का भार खुद वहन करने की नीति लागू की थी, ताकि देश में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन मिल सके। अब उसी व्यवस्था में शुल्क वसूलने की तैयारी पूरी तरह गलत और आम जनता पर बोझ डालने वाली है। नागेंद्र गुप्ता ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह जनहित व व्यापारियों के हित को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करे और शुल्क लगाने के प्रस्ताव को वापस ले।



