‘नंद घर आनंद भयो’ के जयकारों से भक्ति रस में डूबा नैला: स्वामी राघवाचार्य जी ने सुनाया कृष्ण जन्मोत्सव और वामन अवतार का प्रसंग


भोपालपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन; जड़भरत, अजामिल मोक्ष व श्रीराम कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
🔴आज की बात News | जांजगीर-नैला । भोपालपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा पंडाल में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्यासपीठ पर विराजित पूज्य स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज ने प्रभु की विभिन्न बाल लीलाओं, अवतारों और पावन चरित्रों का संगीतमय वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया गया, जिससे पूरा परिसर ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

मोह-माया से परे प्रभु चरणों की भक्ति ही मोक्ष का मार्ग ; स्वामी राघवाचार्य जी
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने जड़भरत उपाख्यान सुनाया। उन्होंने बताया कि मोह और आसक्ति के कारण राजा भरत को अगले जन्म में हिरण बनना पड़ा, इसलिए जीव को सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर परमात्मा की अनन्य भक्ति करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भूगोल और 21 प्रकार के नरकों का वर्णन करते हुए शुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को दिए गए उपदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि निष्काम भक्ति से जीव जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।

नाम-महिमा: भाव से या अनजाने में, प्रभु नाम करता है उद्धार
कथा में भक्ति की महिमा समझाते हुए पूज्य महाराज श्री ने ‘हो जाओ तैयार गाड़ी स्टेशन पे आती है’ और ‘राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट’ का भाव स्पष्ट करते हुए अजामिल मोक्ष की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम कैसे भी लिया जाए, वह कल्याण ही करता है। इसके बाद भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाते हुए बताया कि अपने भक्त की वाणी और विश्वास की रक्षा के लिए भगवान नृसिंह खंभे को चीरकर प्रकट हुए। समुद्र मंथन, वामन अवतार और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कथा का भी सुंदर चित्रण किया गया।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, बंटा माखन-मिश्री का प्रसाद
कथा के चौथे दिन जैसे ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन प्रसंग आया, पूरा पंडाल बधाई गीतों से झूम उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर और भजनों की धुन पर थिरकते हुए कान्हा के बाल रूप का स्वागत किया। जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में माखन-मिश्री और खिलौनों का प्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाआरती में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया।




