सती चरित्र त्याग और पतिव्रत धर्म का सर्वोत्तम उदाहरण: गोस्वामी गोविंद बाबा

बसईवाल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन; विधायक ब्यास कश्यप सहित कई गणमान्य नागरिक पहुंचे, ध्रुव चरित्र सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
🔴 आज की बात News | जांजगीर-नैला। “सती चरित्र त्याग, निष्ठा और पतिव्रत धर्म का सर्वोत्तम उदाहरण है। जहां अपने आराध्य का अपमान हो, वहां एक क्षण भी नहीं रुकना चाहिए।” उक्त उद्गार भारत राइस मिल परिसर में बसईवाल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन व्यासपीठ पर विराजित सुप्रसिद्ध कथाकार गोस्वामी गोविंद बाबा ने व्यक्त किए। कथा प्रारंभ होने से पूर्व यजमान दंपति ने व्यासपीठ का विधिवत पूजन कर कथावाचक का पुष्पाहार से आत्मीय स्वागत किया।
सती का त्याग और सम्मान ही धर्म की नींव
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए संत गोविंद बाबा ने राजा दक्ष के यज्ञ और माता सती के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बिना बुलाए पिता के यज्ञ में पहुंचीं सती जब अपने पति देवाधिदेव महादेव का अपमान सहन नहीं कर सकीं, तो उन्होंने उसी यज्ञ कुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी। बाबा ने कहा कि सती का यही पावन त्याग बाद में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लेकर पुनः शिव से मिलन का माध्यम बना। सच्चा प्रेम और सम्मान ही धर्म की वास्तविक नींव है।
मात्र 5 वर्ष के बालक ध्रुव की कथा दृढ़ संकल्प और अटल भक्ति का प्रतीक
तृतीय दिवस पर भक्त ध्रुव के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कथावाचक ने कहा कि विमाता सुरुचि के कटु वचनों के बाद माता सुनीति की प्रेरणा से मात्र 5 वर्षीय बालक ध्रुव घोर वन में तपस्या करने चला गया। देवर्षि नारद द्वारा बताए गए ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप कर बालक ध्रुव ने छह माह की कठोर तपस्या से भगवान श्रीहरि विष्णु को साक्षात प्रकट होने पर विवश कर दिया। भगवान ने ध्रुव को आकाश में सबसे ऊंचा और अटल स्थान ‘ध्रुव तारा’ बनने का वरदान दिया। महाराज श्री ने संदेश दिया कि उम्र चाहे छोटी हो या बड़ी, यदि संकल्प दृढ़ हो तो परमात्मा की प्राप्ति निश्चित है।
कथा के तीसरे दिन खचाखच भरे पंडाल में जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप, उद्योगपति लीलाधर सुल्तानिया, नरेंद्र पालीवाल, शिवरीनारायण से निरंजन अग्रवाल, सक्ती से कन्हैया गोयल, नरेश गेवाडीन, डॉ. संतोष मोदी, अधीक्षण अभियंता (पीएमजीएसवाई, रायपुर) श्री तिवारी एवं श्री शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।





