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किसान स्कूल के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन को कृषि मंत्री ने किया सम्मानित: चेच भाजी, अमारी, अलसी और केले के रेशे से बनाया कपड़ा; पीएम मोदी भी पहन चुके हैं प्राकृतिक जैकेट

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित समारोह में मिला सम्मान; पारंपरिक फसलों के तनों से धागा और वस्त्र बनाकर ग्रामीण उद्यमिता को दी नई दिशा

🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। पारंपरिक खेती को केवल अनाज और सब्जी उत्पादन तक सीमित न रखकर कृषि अपशिष्ट व स्थानीय वनस्पतियों से मूल्यवान उत्पाद तैयार करने वाले जांजगीर-चांपा जिले के नवाचारी कृषक रामाधार देवांगन को राजधानी रायपुर में सम्मानित किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। रामाधार देवांगन देश के पहले किसान स्कूल ‘वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल, बहेराडीह’ से जुड़े हैं और बलौदा ब्लॉक के ग्राम सिवनी के निवासी हैं।

पारंपरिक भाजियों और फसलों के रेशे से कपड़ा बनाने का अनूठा प्रयोग

रामाधार देवांगन ने कृषि और ग्रामीण संसाधनों के जरिए आजीविका की नई राह तलाशते हुए प्राकृतिक रेशों पर उल्लेखनीय अनुसंधान किया है। उन्होंने अपनी सहयोगी टीम के साथ मिलकर अलसी, केला और भिंडी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक भाजियों अमारी और चेच भाजी के तनों से रेशा निकालने की तकनीक विकसित की। इन प्राकृतिक रेशों को प्रसंस्कृत कर उच्च गुणवत्ता का कपड़ा तैयार किया गया, जिससे जैकेट सहित कई उपयोगी परिधान बनाए जा रहे हैं। उनका मानना है कि खेतों में बेकार समझे जाने वाले पौधों के डंठल और तने मूल्यवर्धन के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंची प्राकृतिक जैकेट

किसान स्कूल बहेराडीह और रामाधार देवांगन की टीम द्वारा तैयार की गई यह विशेष प्राकृतिक जैकेट देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और राज्यमंत्रियों को भेंट की जा चुकी है। स्थानीय स्तर पर शुरू हुए इस देसी प्रयोग को राष्ट्रीय मंचों पर मिली इस पहचान ने बहेराडीह किसान स्कूल के नवाचारों को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है। यह पहल साबित करती है कि गांव के संसाधनों को यदि हुनर और तकनीकी समझ से जोड़ा जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र से भी वैश्विक स्तर के उत्पाद तैयार हो सकते हैं।

पूर्व में राष्ट्रीय पुरस्कार से भी हो चुके हैं नवाजे

कृषि क्षेत्र में मूल्यवर्धन और ग्रामीण स्वरोजगार के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए रामाधार देवांगन को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विभाग के सहयोग से पहले भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। वे लगातार ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को इस विधा का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं।

किसान स्कूल बना नवाचार का केंद्र

बहेराडीह स्थित देश का पहला किसान स्कूल आज खेती के साथ-साथ कृषि आधारित उद्यमिता की प्रमुख प्रयोगशाला बन चुका है। यहां किसानों को आधुनिक खेती के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों से नए व्यवसाय शुरू करने के गुर सिखाए जाते हैं। रामाधार देवांगन के राज्य स्तर पर सम्मानित होने पर किसान स्कूल परिवार, बिहान समूह की महिलाओं, आरसेटी, कृषि विज्ञान केंद्र तथा जांजगीर-चांपा व सक्ती जिले के प्रगतिशील किसानों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

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