शरद पूर्णिमा पर बरसेगा अमृत: 25 अक्टूबर की रात रखा जाएगा खीर, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और तिथि का भ्रम

16 कलाओं से युक्त चंद्रमा की चांदनी में खीर रखने से दूर होंगे रोग; उदयातिथि के अनुसार 26 अक्टूबर को होगा स्नान-दान
🔴 आज की बात News | जांजगीर-चांपा। सनातन परंपरा में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वर्ष की सबसे पावन व चमत्कारी रातों में गिना जाता है। शास्त्रों में इसे शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा तथा रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस पावन निशा पर चंद्रदेव अपनी समस्त 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृत की वर्षा करते हैं। इस दिन खुले आकाश के नीचे खीर रखने और माता लक्ष्मी व भगवान श्रीकृष्ण की विशेष आराधना करने का विधान है।
तिथि को लेकर संशय दूर, 25 अक्टूबर की रात मनेगा पर्व
पंचांग गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे से प्रारंभ होगी और इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की मुख्य पूजा, चंद्र दर्शन और चांदनी में खीर रखने का विधान निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में किया जाता है। चूंकि 25 अक्टूबर की रात ही चंद्रमा पूर्ण कलाओं के साथ उदित रहेगा, इसलिए मुख्य पर्व 25 अक्टूबर की रात को ही मनाया जाएगा। वहीं उदयातिथि के अनुसार पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का कार्य 26 अक्टूबर की सुबह संपन्न होगा।
औषधीय गुणों से भरपूर चांदनी, खीर रखने का वैज्ञानिक व धार्मिक महत्व
धार्मिक व आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की शीतल चांदनी में स्वास्थ्यवर्धक व औषधीय गुण विद्यमान होते हैं। गाय के दूध और चावल से तैयार खीर को मिट्टी या कांच के बर्तन में रखकर महीन कपड़े अथवा जाली से ढंक दिया जाता है, जिससे चंद्रमा की किरणें सीधे उस पर पड़ें। सुबह इस अमृत तुल्य खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से पित्त दोष शांत होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पूरे वर्ष उत्तम स्वास्थ्य बना रहता है।
कोजागरी पूजा में मां लक्ष्मी का आह्वान
शास्त्रों के अनुसार इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और ‘को जागर्ति’ यानी कौन जाग रहा है का उद्घोष करती हैं। रात्रि में जागरण कर माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन और श्रीसूक्त का पाठ करने से घर में स्थाई सुख-समृद्धि का वास होता है। इस वर्ष कोजागरी पूजा का निशित मुहूर्त रात 11:40 बजे से देर रात 12:31 बजे तक रहेगा।
चंद्र दर्शन और खीर रखने का शुभ मुहूर्त
25 अक्टूबर को शाम 5:40 बजे के बाद चंद्रोदय होगा। खुले आकाश के नीचे खीर रखने के लिए रात 8:30 बजे से मध्यरात्रि 11:30 बजे तक का समय सर्वाधिक शुभ माना गया है। श्रद्धालु इस निश्चित समयावधि में पूजन कर अमृत वर्षा का पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।



