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वेदांता प्लांट हादसा: 16 मौतों के बाद जागी कंपनी; हर पीड़ित परिवार को 35 लाख की सहायता और एक सदस्य को नौकरी का आश्वासन

सक्ती/सिंघीतराई: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित सिंघीतराई वेदांता पावर प्लांट में मंगलवार दोपहर हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 16 हो गई है, जबकि 18 से अधिक मजदूर अभी भी गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद भारी जन आक्रोश और चौतरफा दबाव के बीच कंपनी प्रबंधन ने अब मुआवजे की घोषणा की है।

प्लांट परिसर बना श्मशान, मची अफरा-तफरी

मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे जब मजदूर अपने काम में व्यस्त थे, तभी प्लांट के बॉयलर में एक जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि प्लांट का एक हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया और चारों ओर गर्म गैस व आग का गुबार फैल गया। कई मजदूरों को भागने तक का मौका नहीं मिला। मौके पर ही 4 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि अन्य ने अस्पताल ले जाते समय और इलाज के दौरान दम तोड़ा।

मुआवजे का मरहम: 35 लाख रुपये और नौकरी

हादसे के 24 घंटे बाद कंपनी प्रबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर मुआवजे का ऐलान किया है:

  • मृतक परिवार: प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
  • स्थायी रोजगार: पीड़ित परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार वेदांता में स्थायी नौकरी दी जाएगी।
  • घायलों के लिए: गंभीर रूप से घायल मजदूरों को 15 लाख रुपये की सहायता और पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन (Salary) जारी रखने का वादा किया गया है।

रायपुर और रायगढ़ के अस्पतालों में जंग जारी

घायल मजदूरों का इलाज रायपुर के कालड़ा अस्पताल और रायगढ़ के जिंदल फोर्टिस अस्पताल में चल रहा है। कई मजदूरों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है क्योंकि वे 80% से अधिक झुलस चुके हैं। डॉक्टरों की टीम वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखे गए मजदूरों को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया शोक

इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी घटना को “अत्यंत दुखद” बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल

स्थानीय ग्रामीणों और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। कांग्रेस सहित विपक्ष ने इस मामले में न्यायिक जांच और प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। वर्तमान में सक्ती कलेक्टर के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है।

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