
वैश्विक अस्थिरता के बीच आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में भारत की सक्रिय रणनीति
नई दिल्ली: यूएस और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता और संघर्ष जैसे हालातों के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी दबाव महसूस किया जा रहा है, जिससे सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) सतर्क हो गए हैं।
आर्थिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत ने अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में तेज कदम उठाए हैं। इसी रणनीति के तहत विदेशों में सुरक्षित रखा गया भारत का सोना अब तेजी से वापस देश लाया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राष्ट्रीय संपत्ति पर बाहरी जोखिम का असर न पड़े।
वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देश भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि विदेशों में रखा गया उनका सोना और संपत्ति कितनी सुरक्षित है। युद्ध जैसी परिस्थितियां और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते देश अब अपने-अपने स्वर्ण भंडार को स्वदेश में सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं।
RBI के ताजा आंकड़े
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है। इसमें से लगभग 77% यानी करीब 680 टन सोना अब देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है।
वहीं 197.67 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास है, जबकि 2.8 टन सोना जमा के रूप में रखा गया है।
छह महीने में बड़ी वापसी
आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में ही भारत ने 104.23 टन सोना वापस देश में लाया है। यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अब अपनी रणनीतिक संपत्तियों को विदेशी जोखिमों से दूर रखने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
बदलती आर्थिक रणनीति
मार्च 2023 तक जहां केवल 37% सोना भारत में रखा गया था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 77% तक पहुंच गया है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक अस्थिरता को गंभीरता से लेते हुए अपनी आर्थिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।



