
सोशल मीडिया पर उभरे व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन को लेकर सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा- यह देश के विपक्षी दलों के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत है।
मुंबई। देश की डिजिटल राजनीति में इन दिनों एक अनोखा नाम तेजी से उभर रहा है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)। व्यंग्य, मीम्स और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर तीखे डिजिटल कैंपेन के जरिए यह काल्पनिक संगठन लाखों युवाओं के बीच चर्चा का केंद्र बन चुका है। अब इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी खुलकर सामने आने लगी हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय राजनीति के लिए गंभीर संकेत बताया है। उनका कहना है कि युवाओं का गुस्सा अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मुख्यधारा की राजनीति से गहरे मोहभंग के रूप में दिखाई दे रहा है।
“युवा विपक्ष को विकल्प नहीं मान रहे”
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि देश में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक जैसे मुद्दों ने युवाओं के भीतर भारी असंतोष पैदा किया है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि युवा अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए स्थापित विपक्षी दलों की बजाय एक व्यंग्यात्मक डिजिटल मंच का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति विपक्षी राजनीति के लिए आत्ममंथन का विषय है। यदि युवा खुद को प्रतिनिधित्वहीन महसूस कर रहे हैं, तो राजनीतिक दलों को अपनी भाषा, रणनीति और जनता से संवाद के तरीके पर पुनर्विचार करना होगा।
एक्स अकाउंट पर प्रतिबंध, फिर भी नहीं रुका अभियान
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आधिकारिक एक्स अकाउंट भारत में प्रतिबंधित किए जाने के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। हालांकि प्रतिबंध के कुछ ही समय बाद समर्थकों ने नया हैंडल बनाकर अभियान फिर शुरू कर दिया। इंस्टाग्राम समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस डिजिटल अभियान की पहुंच लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में युवा बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर इस मंच के जरिए अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं।
सरकार पर आवाज दबाने के आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने अकाउंट प्रतिबंध को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की बढ़ती नाराजगी और डिजिटल विरोध को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल से ज्यादा युवाओं की निराशा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास का प्रतीक बन चुका है।
एक टिप्पणी से शुरू हुआ डिजिटल आंदोलन
बताया जा रहा है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत 15 मई को हुई, जब कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से किए जाने का मुद्दा सोशल media पर वायरल हो गया। इस टिप्पणी को युवाओं ने अपमान के रूप में लिया और विरोधस्वरूप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से डिजिटल अभियान शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मंच बेरोजगारी, सरकारी भर्ती, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों का बड़ा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन गया।
“राजनीतिक दलों को बदलनी होगी सोच”
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि युवाओं की समस्याओं को केवल चुनावी मुद्दा मानने की गलती अब राजनीतिक दलों को भारी पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दल समय रहते युवाओं की आकांक्षाओं और असंतोष को नहीं समझ पाए, तो आने वाले समय में इसके बड़े राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।




