क्राइमसक्ती

सक्ती में सनसनी: गुटखे के लिए पैसे मांगे, मना करने पर मां की हत्या; आरोपी गिरफ्तार

भेड़ीकोना गांव में पैसे नहीं मिलने पर बेटे ने मां के सिर पर पत्थर से किया हमला, उपचार के दौरान हुई मौत; पुलिस ने 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल।

🔴 Aaj Ki Baat News | सक्ती

सक्ती जिले के डभरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भेड़ीकोना गांव में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। गुटखा खाने के लिए पैसे मांगने पर मां द्वारा इनकार किए जाने से नाराज बेटे ने अपनी ही मां पर पत्थर से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। मामले में पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 14 जून की शाम तिहारिन बाई माली अपने पुत्र लखन माली को घर में खाना खिला रही थीं। इसी दौरान लखन माली ने विमल गुटखा खरीदने के लिए अपनी मां से पैसे मांगे। मां ने पैसे देने से मना किया तो आरोपी गुस्से में आ गया।

पहले मारपीट, फिर पत्थर से किया हमला

बताया जा रहा है कि पैसे नहीं मिलने पर लखन माली ने अपनी मां के साथ हाथ-मुक्कों से मारपीट शुरू कर दी। जान बचाने के लिए तिहारिन बाई वहां से भागने लगीं, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा किया और घर के पास लगे टेप नल के समीप पत्थर उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन तत्काल उन्हें उपचार के लिए डभरा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस ने दिखाई तत्परता

घटना की सूचना मिलते ही डभरा पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल एवं एसडीओपी सुमित गुप्ता के निर्देशन में पुलिस टीम सक्रिय हुई।

24 घंटे के भीतर आरोपी गिरफ्तार

थाना डभरा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 जून को आरोपी लखन माली (25 वर्ष) को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त पत्थर भी जब्त कर लिया है। आवश्यक साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

कार्रवाई में निरीक्षक राजेश पटेल, एएसआई हर नारायण ताम्रकार, पीएसआई तेजेंद्र कुमार सिन्हा, महिला प्रधान आरक्षक चंद्रकला सोन, आरक्षक मिरिश साहू एवं रामगोपाल यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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