
ध्वनिमत से पारित विधेयक में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर कड़े दंड, समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रस्ताव।
🔴 Aaj Ki Baat News | नई दिल्ली
लोकसभा ने बुधवार को हंगामे के बीच ध्वनिमत से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया। विधेयक में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में सजा और जुर्माने के प्रावधान पहले से अधिक कड़े किए गए हैं।
पेपर लीक पर कड़े दंड का प्रस्ताव
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के मामलों में न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास तथा ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है।
समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक अदालतें
संशोधन के तहत ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है, जहां आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी की जाएगी।
हंगामे के बीच पारित हुआ विधेयक
विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया, जिसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी।
सरकार ने कानून और सख्त करने की बताई जरूरत
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 में लागू कानून के बाद सामने आई खामियों को देखते हुए सरकार ने इसे और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और संशोधित कानून लागू होने के बाद ऐसे मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में शीघ्र सुनवाई संभव होगी।




