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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, 8 दिनों में करीब ₹5 बढ़े दाम; आम जनता पर बढ़ा महंगाई का बोझ

पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा, 8 दिनों में आम जनता पर करीब ₹5 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ।

नई दिल्ली। देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता को एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 23 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। मई महीने में यह तीसरी वृद्धि है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ परिवहन और व्यापार क्षेत्र की चिंता बढ़ गई है।

नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे महंगा होकर ₹99.51 प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि डीजल 91 पैसे बढ़कर ₹92.49 प्रति लीटर हो गया है।

बड़े शहरों में क्या हैं नए दाम?

तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा दरों के अनुसार:

कोलकाता में पेट्रोल ₹110.64 और डीजल ₹97.02 प्रति लीटर पहुंच गया है।

मुंबई में पेट्रोल ₹108.49 और डीजल ₹95.02 प्रति लीटर बिक रहा है।

चेन्नई में पेट्रोल ₹105.31 और डीजल ₹96.98 प्रति लीटर हो गया है।

लगातार बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है।

सिर्फ 8 दिनों में ₹5 तक बढ़े दाम

मई महीने में तेल कंपनियों ने आक्रामक तरीके से ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की है।

15 मई 2026: पेट्रोल-डीजल में एकमुश्त ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी।

19 मई 2026: करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा।

23 मई 2026: पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा।

इन तीनों बढ़ोतरी को जोड़ें तो महज आठ दिनों में उपभोक्ताओं पर करीब ₹5 प्रति लीटर का अतिरिक्त बोझ पड़ चुका है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है।

बताया जा रहा है कि इस साल की शुरुआत से अब तक रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत कमजोर हुआ है और फिलहाल एक डॉलर की कीमत लगभग ₹95.6 तक पहुंच गई है।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े घटनाक्रम तथा होर्मुज जलसंधि को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजार में दबाव बना हुआ है।

तेल कंपनियों पर बढ़ रहा नुकसान

सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बिक्री में भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं।

आम जनता और कारोबार पर पड़ेगा असर

लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल-सब्जियां, दूध, किराना और दूसरी जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।वहीं टैक्सी, ऑटो और ट्रक यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है।

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