महिला आरक्षण पर भाजपा का तीखा प्रहार: ‘विपक्ष ने किया महिलाओं के साथ विश्वासघात, कांग्रेस को भुगतना होगा पाप का फल’ CM विष्णुदेव साय बोले- यह 70 करोड़ महिलाओं के साथ धोखा; अरुण सिंह ने विपक्ष के ‘जश्न’ पर जताया दुख

रायपुर। राजनीति में हार-जीत चलती रहती है, लेकिन जब मुद्दा देश की आधी आबादी के हक का हो, तो हार के बाद बजने वाली तालियां चुभने लगती हैं। लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के पारित न हो पाने के बाद भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष ने बिल नहीं गिराया, बल्कि करोड़ों महिलाओं के ‘भरोसे’ का कत्ल किया है।
तालियां जो इतिहास को चुभेंगी!
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए एक भावुक बयान दिया है। उन्होंने कहा, सदन में जब यह ऐतिहासिक बिल गिरा, तो हमारी आंखों में आंसू थे, लेकिन कांग्रेस, सपा और आरजेडी के सांसद मेजें थपथपाकर जश्न मना रहे थे।” अरुण सिंह ने इसे इतिहास का ‘काला अध्याय’ बताते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकार छीनकर खुश होना कांग्रेस के पतन की शुरुआत है।
70 करोड़ महिलाओं का अपराधी कौन?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे को सीधे तौर पर ‘आस्था और अधिकार’ से जोड़ दिया है। उन्होंने दो टूक कहा कि जिस देश में नारी को देवी माना जाता है, वहां कांग्रेस, टीएमसी और सपा जैसी पार्टियों ने 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है।
CM साय के प्रहार के 3 बड़े बिंदु:
1. कांग्रेस का दोहरा चरित्र:** तीन दशक तक महिला आरक्षण को फाइल में दबाकर रखा और जब मोदी सरकार ने हक देना चाहा, तो रोड़े अटका दिए।
2. डर की राजनीति:** विपक्ष को डर है कि अगर सामान्य घरों की बेटियां विधानसभा और लोकसभा पहुंच गईं, तो उनकी ‘परिवारवादी’ राजनीति खत्म हो जाएगी।
3. छत्तीसगढ़ मॉडल का हवाला:** साय ने याद दिलाया कि जहां भाजपा महिलाओं को ‘महतारी वंदन’ के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है, वहीं विपक्ष उन्हें राजनीतिक शक्ति देने से घबरा रहा है।
संसद से सड़क तक अब ‘रण’ होगा
भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को ठंडा नहीं होने देगी। 33 प्रतिशत आरक्षण का सपना भले ही आज अधूरा रह गया हो, लेकिन भाजपा इसे 2029 की लड़ाई का सबसे बड़ा हथियार बनाने जा रही है। पार्टी अब “गांव-गांव, घर-घर” जाकर यह बताएगी कि संसद में महिलाओं के हक के लिए किसने लड़ाई लड़ी और किसने ‘पीठ में छुरा’ घोंपा।





